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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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स्पष्ट आवाज में दूसरों को जगाने लगा, "जागोऽऽ, जागो।" थोड़े ही समय में इखलासखान के साथ मुकर्रब के सभी बेटे, सिपहसालार, यार दोस्त, रिश्तेदार, फौजी सब मिलकर लगभग तीन हजार की भीड़ मुकर्रब के डेरे के सामने एकत्र हो गयी। गणोजी शिर्के और नागोजी माने को अन्दर बुलाया गया। मुकर्रबखान ने गणोजी को बाँहों में भरते हुए, प्रेमपूर्वक व्यग्रता से कहा, "गणोजी तुम हमारे भाई बन्धु ही लगते हो। तुम्हारी खबर पक्की है। बादशाह का पत्र भी आ चुका है। मेरे गुप्तचरों ने भी खबर दी है। चलोऽ! आज रात में ही आक्रमण कर दें।" थोड़ी देर में ही विचार-विमर्श कर लिया गया। मुकर्रबखान ने नागोजी से कहा, "नागो मराठा, आप अभी, इसी वक्त शीघ्रता से कराड़ की ओर कूच करो। कराड़ के थानेदार को जगाओ और वहाँ आसपास की सारी चौकियों की फौज एकत्र करो। कम से कम दस से पन्द्रह हजार की फौज तैयार रखो। समय सूचना देकर नहीं आता।" इस स्थिति में मुकर्रबखान के चेहरे पर सफलता की कल्पना से प्रसन्नता झलक रही थी। मुकर्रब ने अपने सभी प्रमुख सरदारों को शामियाने के अन्दर बुला लिया। सभी को वजीरे आजम के पत्र की जानकारी दी। उसने बड़ी अधीरता से कहा, "यारोऽ अब नींद, अन्न-पानी के जैसी सारी बातों को भूल जाओ। अब मेरे साथ तुरन्त चल पड़ो। वक्त बुरा है। रास्ता तो बहुत ही कठिन है। अन्दर की नदी की धारा में बड़े बड़े मगरमच्छ नंगा नाच कर रहे हैं। इस बात की पूरी जानकारी होते हुए भी हमें जानबूझकर उफनती नदी में छलांगें लगानी हैं।" "खान साहब, जोश में होश मत खोइये-" एक जोरदार भारी भरकम आवाज कानों में पड़ी। "कौन? कौन है वह?" मुकर्रब भड़क उठा। बीजापुर का एक अनुभवी सरदार उठकर खड़ा हो गया और खान से स्पष्ट शब्दों में कहने लगा, "खानसाहब, आपकी बहादुरी और बुलन्द इरादों के बारे में हममें से किसी को कोई शक नहीं है। किन्तु बीजापुर वालों की चाकरी में रहते हुए इधर की पहाड़ियों में मैंने अनेक बार सफर किया। जिस समय पन्हाला से शिवाजी का पीछा करते हुए सिद्दी जौहर की फौज विशालगढ़ तक गयी थी, तब मैं एक अदना सा घुड़सवार सिपाही था। उस समय मेरी उम्र केवल बीस वर्ष थी। मैंने उस भयानक पहाड़ी को अपनी आँखों से देखा है।" "आप कहना क्या चाहते हैं?" "इतना ही कि यह पहाड़ी नहीं पाताल है।" वह बूढ़ा सरदार बताने लगा, "खान साहब उस रास्ते में आंबा घाटी के पास मे जाने वाली ढालू चट्टान और टीले सम्भाजी 623