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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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नहीं कर सकता। और खान साहब मैं पिछले कई महीनों से बादशाह से और आपलोगों से भी हाथ जोड़कर कह रहा हूँ कि सम्भाजी पर सामने से आक्रमण करने का सपना मत देखिए। यह तुम्हारे बाप से भी सम्भव नहीं होगा।" "तो फिर क्या करना होगा?" "खान साहब! हमारा इतिहास गवाह है कि शूर-वीर मराठों की छाती सामने से किये गये तलवार के वार से कभी नहीं कटती। किन्तु उनकी पीठ में भोंका गया गद्दारी का खंजर बहुत गहरे गड़ जाता है। वह खंजर यदि अपने आत्मीय जनों द्वारा चलाया गया हो तो मिलने वाली सफलता बहुत बड़ी होती है।" "याने कि?" "अब कुछ भी सोच-विचार न कीजिए। सामने का आंबा घाट का रास्ता भूल जाइये। मेरे पीछे-पीछे आइये। साहसपूर्वक अणुस्कुरा घाट से नीचे उतरेंगे। उस दुष्ट सम्भा को पता भी नहीं चलेगा और हम उसकी पीठ तक पहुँच जाएँगे।" दोनों रास्तों की लाभ-हानि को गणोजी ने अच्छी तरह समझा दिया। खान के साथियों ने भी पेड़ के नीचे खड़े-खड़े ही मसलहत कर ली। सभी सहमत हो गये। मुकर्रबखान की फौज के लिए आंबा घाट सचमुच मौत का मुँह था। मलकापुर की सात हजार फौज स्वप्न में भी मुगलों को घाट न उतरने देती। अणुस्कुरा की ओर की घाटियाँ और रास्ते बहुत ही कष्टकर थे। सम्भव था कि इस घाटी को उतरते समय पैर फिसलने के कारण मरते। किन्तु उस ओर से आने पर सफलता की आशा सभी को आकर्षित कर रही थी। मुकर्रबखान अपने घोड़े से नीचे उतरा। अत्यन्त भावविह्वल होकर वह गणोजी से लिपट गया। उसने गणोजी को चार-पाँच बार चूम लिया। अश्रुपूरित आँखों से गणोजी को अपनी बाँहों में लिये वह कहने लगा, "गणोजी राजा! लोग कहते हैं कि तुम उस शिवाजी महाराज के जमाई हो। उस सम्भा के साले हो। सच हो सकता है किन्तु मुझे उससे क्या मतलब? किन्तु खुदा की कसम खाकर कहता हूँ, गणोजी पिछले जन्म में तुम निश्चय ही मेरे सगे भाईजान ही रहे होगे।" छह सम्भाजी :: 627