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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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सुदूर तमिलों के प्रदेश जिंजी में केसो त्रिमल के पास सात-आठ हजार की सेना थी। उस पर भी विचार किया गया। म्हालोजी घोडपड़े ने कहा, "उस ओर जब तक केसो पन्त की सुसज्ज सेना का दबाव बना रहेगा तब तक हरजी महाड़िक की स्वार्थी महत्त्वाकांक्षाओं को बढ़ने का अवकाश नहीं मिलेगा। उन्हें अपनी जगह पर ही रुका रहना होगा।" महारानी येसूबाई और खंडो बल्लाल ने अपना हिसाब-किताब बैठक के सामने प्रस्तुत किया। प्रत्येक किले पर कितने गोले-बारूद और कितने हीरे- जवाहरात हैं? प्रत्येक क्षेत्र में कितनी सेना है? जंगलों, पहाड़ों और घाटियों में कितनी चौकियाँ हैं और उन पर पहरे की कैसी व्यवस्था है? प्रत्येक किले में कितने अनाज का भंडार है? यदि आसन्न युद्ध तीन वर्ष तक चलता रहे तो किस किले पर कितने दिन का अनाज कम पड़ेगा? आवश्यकता पड़ने पर रसद किस क्षेत्र से ले आयी जा सकती है? इस प्रकार के विषयों पर विस्तृत चर्चा हो रही थी। यद्यपि यह सारा विवरण लिखित में रखा गया था, किन्तु महारानी येसूबाई और खंडो बल्लाल को सबको जबानी याद था। शम्भूराजा चुप न रह सके। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, "महारानी येसूबाई! आप यह सारा हिसाब-किताब सँभालती हैं इसीलिए मुझ जैसे सिपाही को रात-दिन युद्ध के मैदान में दौड़-धूप करने का अवसर मिलता है।" शहजादा आजम अपनी बीस हजार की सेना के साथ चाकण के पास घेरा डाले बैठा था। वह किसी भी समय कोंकण में उतर सकता है। इसके अतिरिक्त फिरोजजंग सम्भवतः किसी बीच के रास्ते का फायदा उठाकर राजगढ़ में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा था। गुप्तचरों द्वारा इस प्रकार की खबरें मिल रही थीं। इन दोनों मोर्चों पर किस प्रकार की तैयारी की जाय? इसका निर्देश भी महाराज ने दिया। इसी बीच संगमेश्वर के सूबेदार एक हरकारे के साथ बैठक में प्रविष्ट हुए। घबराया हुआ हरकारा बताने लगा, "महाराज इस खबर का पक्का प्रमाण तो नहीं है किन्तु बाहर लोग इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि इस जंगल में महाराज के प्राणों को खतरा है। इसलिए यहाँ से तत्काल कूच कर जाना ही उचित होगा।" शम्भू महाराज क्षण भर के लिए चिन्तित दिखाई पड़े। उन्होंने तत्काल कहा, "सच है, हमें यहाँ अधिक समय नहीं गँवाना चाहिए। बैठक समाप्त हो गयी है। रात्रि-भोजन पूरा हो जाने के पश्चात् सभी को अपने-अपने कार्य पर चला जाना है।" उस गुप्तचर के आने के बाद बैठक में कुछ सुगबुगाहट आयी। उस समय शम्भूराजा ने हँसते हुए कहा, "घबराने की कोई बात नहीं है। हमने यथायोग्य सावधानी बरती है और आगे भी सावधान रहेंगे। इस प्रदेश के घनघोर जंगल में, दिन में भी आवागमन करते समय शेर को भी पसीना छूट जाता है, सूर्य की किरणें 642 :: सम्भाजी