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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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है कि भय के इस भयानक पर्वत को लाँघकर हम आगे बढ़ सकेंगे?'' "क्यों नहीं? क्यों नहीं महाराज?'- खंडो बल्लाल कहते हुए खड़े हो गये। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा, "महाराज! आपने बहुत झेला और सहन किया है। नासिक-वगलाण की ओर कुछ टूट-फूट हुई होगी। फिर भी आपने सह्याद्रि पर्वत के बहुत से सशक्त किलों में से एक भी उस गीदड़ औरंगजेब के क़ब्ज़े में नहीं जाने दिया। बड़े महाराज के जंगी बेड़े में से एक भी जहाज कम नहीं होने दिया है। उल्टे आपने उनमें साठ-सत्तर जलपोतों की वृद्धि की है। हमारे पास इतनी शक्ति है कि हम आने वाले पचास वर्षों तक उस पापी औरंगजेब के सेना- समुद्र को पछाड़ते रहेंगे।" उस महत्त्वपूर्ण बैठक के समाप्त होते-होते शाम घिर आयी। सन्ध्या समय की ठंडी हवा चल रही थी। महल में चिरागों की लव फरफरा रही थी। मन्त्रणा समाप्त हो जाने पर भी महाराज के पैर वहीं पर ठिठके हुए थे। आगे नहीं बढ़ रहे थे। यह देखकर अन्य लोग भी वहीं पर खड़े हो गये। महाराज ने गर्जना की, "दोस्तो! औरंगजेब जैसे कलिकाल का मुकाबला करने के लिए मैंने हर सम्भव उपाय किये। आप ही लोगों की सहायता से हमने जंजीरे के सिद्दियों को ऐसा कुचला कि औरंगजेब जैसे सहायक के होने पर भी वे जंजीरे की बिल से बाहर नहीं निकल सके। गोवा के पुर्तगालियों की सारी मस्ती उतारकर हमने उन्हें वहीं पर रोक दिया। एक ओर अरबों से मित्रता की तो दूसरी ओर अंग्रेजों को छावनियों से निकलने नहीं दिया। तमिल और कर्नाटक पर दो-दो बार आक्रमण करके उनके किलों पर भगवा झंडा फहराया। बीजापुर और गोलकुंडा वालों से मित्रता करके दिल्लीश्वर बादशाह को लाचार बना दिया। उसकी पाँच लाख की सेना को आठ वर्ष तक नंगा नाच नचाया और महाराष्ट्र को बचाया।" "वाह! महाराज, वाह!" सभी ने एक साथ गर्जना की। ऐसा लगा मानो शम्भू महाराज की बात सुनकर वर्षा ऋतु के मेघ घहराने लगे। महाराज की आँखों की पुतलियाँ कड़कती बिजलियों की तरह चमकने लगीं। उन्होंने सभी की ओर देखकर धीमे किन्तु दृढ़ स्वर में कहा, "एक शिवाजी महाराज के यश की ध्वजा, आकाश की ऊँचाई तक फहराने के लिए, मेरे जैसे सैकड़ों सम्भाजी सिरों की बौछार युद्ध भूमि में हो जाये तो अच्छा ही होगा।" 644 :: सम्भाजी