छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 659, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंदिखाई दे रही थी। आरम्भ में इस अकल्पित और अनपेक्षित आक्रमण से मराठी सैनिक घबरा गये थे। किन्तु जब अपने प्राणों से प्रिय राजा की जान का खतरा उन्हें महसूस हुआ तो सभी मराठी सैनिक भड़क उठे। सन्ताजी और खंडो बल्लाल तो आग-बबूला हो उठे। उन्होंने अपने भाले सँभाले। मराठों के घोड़े मुगलों के घोड़ों पर आक्रामक हो उठे। 'पकड़ो', 'मारो', 'कुचल दो' जैसे शब्द युद्धभूमि में लाई की तरह फूटने लगे। कुछ मराठा सैनिक बगल के घने पेड़ों और झाड़ियों की आड लेकर भाले चलाने लगे। अपने राजा को बचाने के आवेश और जोर-जोर से चिल्लाने से इतना शोर उठा कि मुकर्रब को लगा कि जितने लोग सामने हैं उसके दुगुने झाड़ियों में छिपे हैं। परन्तु अपने प्राणों की चिन्ता किये बिना मुकर्रब सम्भाजी की ओर दौड़ पड़ा। मुगल सैनिकों ने एक साथ सम्भाजी को चारों ओर से घेरने का प्रयास किया। शम्भू महाराज भी ऐसी लड़ाई नहीं किये थे। इसलिए उनके रक्त-मांस में असीम जोश भर गया था। शम्भुराजा के मजबूत हाथों में बहुत पैनी धार वाला भाला था। अपनी पूरी ताकत लगाकर वे तलवारबाजी कर रहे थे। दीवाली के अवसर पर जैसे चकरी चिनगारियाँ चारों ओर बिखेरती अपनी जगह पर घूमती है उसी तरह शम्भू महाराज अपनी जगह पर चारों ओर घूमते हुए अपना घोड़ा नचा रहे थे। शम्भुराजा की सहायता के लिए धनाजी, सन्ताजी और खंडो बल्लाल एक साथ आगे बढ़े। उन्होंने अपने घोड़ों को आक्रामक बनाया। उन्होंने भयानक तलवारबाजी की। इसी बीच नदी की ओर से कुछ पठान धोखे से शम्भुराजा पर टूट पड़े। उनका मुकाबला करने के लिए शम्भुराजा उनकी ओर मुड़े। मुकर्रब इसी बात की प्रतीक्षा कर रहा था कि शम्भुराजा उसकी ओर से किसी तरह असावधान हों। अपने हाथों में हैदराबादी नंगी तलवार लिए मुकर्रब शम्भू महाराज की ओर दौड़ा। शम्भुराजा की पीठ उसकी ओर थी। मुकर्रब अपने घोड़े को दौड़ाते हुए शम्भू महाराज के घोड़े पर चढ़ाने लगा। उसकी तलवार चमक उठी। वह ऐसा वार करना चाहता था कि कम से कम शम्भू महाराज का एक हाथ कन्धे से अलग हो जाय। इसी उम्मीद से उसने शम्भुराजा पर तलवार चलाई। किन्तु इसी बीच एक चमत्कार घटित हुआ। शम्भुराजा के शरीर पर तलवार पहुँचे इसके पहले ही बीच में कोई आ गया। अपने घोड़े से छलाँग लगाकर शम्भुराजा के घोड़े पर कोई आ गया और शम्भुराजा को अपनी गोद में ले लिया और शम्भुराजा के लिए आड़ बन गया। खान की तलवार उस व्यक्ति के कन्धे में कचकचाकर धँस गयी। हड्डियाँ चूर चूर हो गयीं। चारों ओर गर्म खून के फौवारे उड़ने लगे। शम्भुराजा का मखमली कुर्ता भी गर्म लहू से भीग गया। राजा की जान बचाने के लिए अपनी कुर्बानी देने वाला यह हृष्ट-पुष्ट सम्भाजी .. 657