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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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तो गोवा की ओर के रास्ते को रोककर रखिये।" "और महाराज आप?" धनाजी की-आवाज दयनीय हो गयी। सन्ताजी और खंडो बल्लाल ही नहीं, सभी युवक एक-दूसरे को दुखी होकर देखने लगे। उनकी आँखें भर आयीं। वे घोड़े पर बैठे शम्भू महाराज को ऊपर से नीचे तक देखने लगे। "चलो निकलो, छिटक जाओऽ।" शम्भूराजा ऊँची आवाज में आदेश दे रहे थे। किन्तु युवकों की दृष्टि शम्भूराजा के पैरों से चिपक रही थी। "नहीं महाराज, हम आपको अकेला छोड़कर नहीं जाएँगे।" "तो आपके हठ का विपरीत परिणाम होगा। यदि सभी एक साथ मिलकर जाने की कोशिश करेंगे तो सभी पकड़े जाएँगे। यदि ऐसा हुआ तो अनर्थ हो जाएगा।" "महाराजऽऽ" ऐसा घोष करते हुए सन्ताजी घोड़े पर ही औंधा गये। उन्होंने शम्भूराजा की गोद में सिर रख दिया। महाराज उनके खून से मने चीकट बालों में हाथ फेरने लगे। उसी समय महाराज ने धनाजी और खंडो बल्लाल के कन्धों पर हाथ रखकर थपथपाया। युवकों को धीरज बँधाते हुए महाराज ने कहा, "चलो बच्चो, निकलो, अपनी-अपनी रक्षा स्वयं करो। और साथ ही हिन्दवी स्वराज्य की रक्षा करो। इसी दक्खिन की मिट्टी में औरंगजेब की कब्र बनानी है।" "पर महाराज आपको छोड़कर?" "अरे किसलिए हमारे प्राणों की इतनी चिन्ता करते हो?" शम्भूराजा की मुद्रा आत्मविश्वास और स्वाभिमान से भर आयी थी। वे विश्वासपूर्वक गरजे, "माँ के स्तन से दूध पीने वाले बच्चे को अलग करना जिस प्रकार कठिन है उसी प्रकार इस सह्याद्रि की गोद में खेलने वाले इस शम्भू को इससे दूर ले जाना बहुत कठिन है। आपलोग निश्चिन्त होकर आगे जाइये।" चार सम्भाजी और कवि कलश दोनों बड़े वेग से घोड़े दौड़ा रहे थे। पानी और रेत से होकर ये जानवर अपनी जान की बाजी लगाकर भाग रहे थे। कवि कलश के हाथ में असीम वेदना हो रही थी। रक्त बहना बन्द नहीं हो रहा था। अपने प्राणप्रिय राजा को उलझाना भी उचित नहीं लग रहा था। महाराज ने अपने साथ केवल पन्द्रह घुड़सवार लिये थे। उन्हें इस अकल्पनीय संकट से बच निकलना था। शत्रुओं से भरे 660 :: सम्भाजी