छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगणोजी ने दोनों की बची-खुची भौंहें भी निकाल दी थीं। शम्भुराजा अपने प्रदेश को पहचान रहे थे किन्तु उनके सूजन भरे सफाचट मनहूस चेहरे को कोई नहीं पहचान रहा था। थानेदार ने पूछा, "लेकिन गणोजी भाई साहब! आप शम्भू महाराज के पास क्यों जा रहे हैं?" "अरे भाई इन दोनों सौदागरों को उनके चरणो में डालना है। यह मुगलों की सेना भी औरंगजेब से अलग होकर हमारे साथ आ रही है। यह देखकर शम्भू महाराज बहुत प्रसन्न होंगे।" गणोजी ने बड़ी प्रसन्नता से कहा। "जाइये, जाइये दिन रहते ही पहाड़ उतर जाइये।" थानेदार ने सुझाव दिया। अब सामने का पाथरपुंज गाँव समीप आने लगा। छायाएँ लम्बी होने लगीं। सूर्य पश्चिम की ओर झुकने लगा। विगत आठ वर्षों में महाराष्ट्र के पठारी प्रदेश की सभी नदियों, समुद्रतट, गहरी खाइयों, बुरहानपुर की मुगलाई ही नहीं, कर्नाटक की धर्मपुरी, जिंजी, मदुरा से लेकर लोलापुर के मैदानी भाग तक हजारों बहादुर मराठों को प्रेरणा की संजीवनी देने वाला, अपने खून का पानी करके, शिवाजी महाराज के गौरवपूर्ण स्वराज्य के जहाज को पार लगाने वाला सौदागर ही आज काल के कराल गाल में खिंचा जा रहा है। पिछले अनेक वर्षों में माँ की गोद की तरह शम्भू महाराज को सुरक्षित रखने वाला सह्याद्रि अब तेजी से पीछे छूट रहा था। सुदूर अँधेरे में कराड़ की मुगल छावनी पर जलते हुए पलीते दिखाई देने लगे थे। 672 :: सम्भाजी