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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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महत्त्वकांक्षा और जुलूस एक पाथरपुज के मैदान में गड़ेरियो की एक बस्ती थी। राह दिखाने वाले गडेरियो के लड़के बहुत प्रसन्न थे। प्रत्येक को सोने की तीन तीन मोहरें मिली थी। इनमे इल्या पीऱ्या और धाकल्या उम्र में बड़े थे। पीऱ्या की मौसी पाथग्पुंज की गडेरियावाड़ी म रहती थी। इतना बड़ा इनाम मिलन की खुशी में पीऱ्या ने अपनी मौसी को मुर्गा काटने के लिए कहा। घर में मुर्गे का सुस्वादु रम्सा तैयार हो रहा था। इस बीच लड़कों ने रास्ते पर ही गोटियों का खेल रचा लिया था। उन्होंने निश्चय किया था कि मुर्गा रोटी खा लेने के बाद मालेघाट उतरेंगे। परन्तु थोड़ी देर में कुछ लोग डरे-सहमे भागते हुए अपने गाँव की ओर आये। रास्ते में एक दूसरे के साथ कानाफूसी कर रहे थे। उस रहस्यमयी स्थिति और भागदौड को देखकर लडकों को कुछ शका हुई। उन्होने अपना खेल छोड़ दिया। दूसरी ओर पीपल के नीचे पाथग्पुज के सात आठ किसान एकत्र हो गये थे। वे बहुत गम्भीर होकर दबे स्वर में आपस में कुछ खुसुर फुसुर कर रहे थे। “बहुत बुरा हुआ।” “हे भगवान! ऐसा नहीं होना चाहिए था। बड़े महाराज को गुजर अभी दस वर्ष हुए हैं और उनके बेटे की ऐसी दुर्दशा हो गयी ?” पीऱ्या हिम्मत करके आगे बढा और गाँव वालों से पूछने लगा “क्या बात है दादाजी ? इतनी कानाफूसी किसलिए हो रही है ?” “अपने शम्भुराजा को उनके सगे माले ने ही धोखा दिया है। बच्चो! अपने राजा को बैलों की तरह बाँधकर वह बादशाह के पास ले गया है रSS!” वह किसान अपने आँसू पोंछते हुए कह रहा था। “आज शाम को वह नीच गणोजी शिर्के ने शम्भुराजा के साथ धोखा किया और पकड़ ले गया। आज दोपहर को इसी सम्भाजी 673