छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंरास्ते से गये हैं वे सब।" उस किसान की बात कानों में पड़ते ही गड़ेरियों के बच्चों के चेहरे सफेद पड़ गये। वे घबराकर एक-दूसरे की ओर देखने लगे। कुछ धीरज धारण कर धाकल्या चिल्लाया, "क्या कह रहे हैं राव ? हम दोपहर को वहीं पर थे। गणोजी शम्भूराजा को नहीं, हीरे के दो सौदागरों को लेकर गये हैं।" गाँव वालों ने उन बच्चों की ओर ध्यान नहीं दिया। परन्तु उनकी गम्भीर बातें चलती रहीं। यह समाचार आसपास के जंगलों में दावाग्नि की तरह फैल रहा था। स्त्रियाँ और बच्चे रोने लगे। सभी को ऐसा लगा मानो उनके घर का ही कोई गुजर गया है। इतनी जल्दी से बदलने वाले इस वातावरण को देखकर गड़ेरियों के लड़के घबरा गये। वे शोकमग्न हो गये। वे सोचने लगे, 'अनजाने ही हम शिवाजी महाराज के राजपुत्र शम्भू महाराज को संकट में डाल दिये। रायगढ़ के राजेश्वर को पकड़वा दिया। हम शत्रु के रहबर बन गये।' यह कल्पना उन बच्चों के लिए असह्य हो रही थी। बच्चों की आँखों के सामने दोपहर में घोड़े पर बैठा सौदागर प्रत्यक्ष हो गया। उसकी विलक्षण तेज नजर, चमकदार आँखें बच्चों की कल्पना में फिर से प्रकट हो गयीं। वे जंगली पंछी इस कल्पना से पूरी तरह विचलित हो गये। आठों बच्चे बगल की आड़ में चले गये। पीर्या जामुन के तने पर अपना सिर पटकने लगा। धाकल्या ने अपने ही गालों पर तमाचे लगाना शुरू किया। कुछ लोग वहाँ की वनभूमि पर लोटने लगे। एक-दो ने त्रस्त होकर अपने मुँह में मिट्टी भर ली। पीर्या उठकर खड़ा हो गया। उसने कमर में खोंसी हुई स्वर्ण मुद्राओं को बाहर निकाला। गणोजी और मुकर्रबखान द्वारा दिया गया इनाम उसे साँप के विषैले दाँत की तरह लगने लगा। सभी लड़कों ने अपनी मोहरें दूर फेंक दीं। ऐसा करने से उन्हें कुछ हल्का लगा। किन्तु कलेजे में घुसी पश्चाताप की मधुमक्खी उनका पीछा छोड़ने को तैयार न थी। लड़के एक दूसरे के गले में बाँहें डालकर रोने लगे। उनमें सबसे छोटी उम्र के बिरज्या ने पीर्या से पूछा, "दादा, अब हमलोग क्या करेंगे?" अपने गालों को पीटते हुए और रोते हुए पीर्या बोला, "भगवान मल्हारीराय! यह क्या घोटाला हो गया? वह कुत्ता गणोजी शिर्के? उसकी शैतानी धोखेबाजी हमारी समझ में नहीं आयी। भाइयों हम अपने माँ बाप को एक बार भरे कुएँ में ढकेले जाते देख सकते हैं किन्तु हमारे शम्भूराजा को कोई उँगली भी लगाये तो हमसे सहन नहीं होगा। लड़के जोर-जोर मे रोते हुए आपस में बातें करने लगे। इल्या जोर-जोर से रोने लगा। उसका मामा कापुरहोल में रहता था। वहाँ की धाराऊ शम्भू महाराज की दूधमाता थी। उसी का दूध पीकर ही शम्भूराजा छोटे से 674 .. सम्भाजी