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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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"कुछ नहीं, सात-आठ सौ की फौज चल रही थी, कराड़ की दिशा में जा रही थी। गणोजी सबसे आगे घोड़े पर थे। उनके पीछे यवन सैनिक थे मराठा सैनिक बहुत कम थे।" "और क्या क्या देखा?" "मैं आगे क्यों जाता। मेरी बहू गहनों से लदी थी। व्यर्थ में राहजनी का संकट क्यों बुलाता? इसलिए दूर झाड़ी में छुपकर ही उस फौज को देखा। परन्तु सेना के आगे-आगे दो कैदियों को घोड़े पर लादकर ले जा रहे थे।" "देखने में कैसे थे वे कैदी?" "थे तो एकदम गोरे-चिट्टे, मजबूत कद काठी वाले पर उन पर बहुत मार- पीट हुई थी। उनके मुँह में खून सने कपड़े ठूँसे थे। पूरा शरीर रस्सियों और जंजीरों से बाँधा गया था।" "ऐसा?" "फौज के आगे निकल जाने पर मैंने गड़ेरियों के बच्चों से पूछताछ की तब उन्होंने बताया कि गणोजी ने समुद्र के किनारे दो सौदागर पकड़े हैं। उन्हें लेकर उंब्रज की ओर जा रहे हैं।" नरहरिपन्त के बयान से सारी बातें स्पष्ट हो गयीं। सुनने वालों के चेहरे पर प्रेतछाया-सी फैल गयी। सन्ताजी भाव विह्वल हो गये। उन्होंने धनाजी से लिपटकर रोना-कलपना आरम्भ कर दिया। वे विकल होकर चीख पड़े, "धनाऽऽ धोखा हो गया रेऽऽ, यह गणोजी शिर्के रूपी कालसर्प ही अपनी दौलत को डँस गया।" सभी की आँखों में-आँसू भर आये। दुख के आवेग से सैनिक अपनी जगह पर उठने-बैठने लगे। वहाँ कुछ हलचल मच गयी। सन्ताजी ने अपने गर्म आँसू पोंछ लिये। उन्होंने अपनी तलवार को म्यान से बाहर निकाल लिया और ललकारकर बोले, "चलो धनाजी! अभी भी अपने पास छह सात हजार की फौज है। ऐसे ही भागकर चलेंगे और कराड़ पर आक्रमण कर देंगे। उस हरामखोर गणोजी के साथ मुगलों को भी जलाकर खाक कर देंगे।" "सन्ताजी सुनो! मेरी बात शान्ति से सुनो। इस आड़ी-तिरछी पहाड़ी चढ़ाई से कराड़ पहुँचने में हमें कम-से-कम दो-तीन दिन लग जाएँगे। तब तक क्या शत्रु हमारी राह देखता वहाँ बैठा रहेगा।" धनाजी ने कहा। "मतलब?" "पाथरपुंज से कराड़ अधिक दूर नहीं है। रात को भोजन के समय तक मुगल महाराज को लेकर कराड़ पहुँच गये होंगे। वहाँ आसपास रहिमतपुर, इस्लामपुर, औंध जैसी जगहों पर औरंगजेब की चौकियाँ हैं। अब तक उन दुष्टों ने दस-पन्द्रह हजार की सेना साथ लेकर कराड़ भी छोड़ दिया होगा।" धनाजी ने स्पष्ट किया। 684 :: सम्भाजी