भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 688, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 688

"क्या?" येसूबाई ऐसे थरथराई मानो उन पर बिजली गिर गयी हो। दासियों ने उन्हें सहारा देकर संभाला। "कौन पकड़कर ले गया दादासाहब को?" येसूबाई के समीप खड़ी ताराऊ ने पूछा। "मुकर्रबखान।" "मराठों के राजा को पकड़कर ले गये? क्या कहते हो तुम? वे क्या कोई गाय या घोड़ा थे? ऐसा कैसे हो गया?" कुछ समय के लिए लगा कि महारानी की रीढ़ की हड्डी ही चिपक गयी। वे उसी तरह नीचे बैठ गयीं। वे पसीने से भीग गयीं। उन्हें चक्कर आ गया। लोग भाग-दौड़ करने लगे। दासियों ने सफेद प्याज फाड़कर उनकी नाक के पास रखा। महारानी थोड़ी ही देर में मूर्च्छा से बाहर आ गयीं। राजारामसाहब भी वहाँ पर आ गये। उनकी मूर्च्छा का कारण वह धक्कादायक समाचार था। विगत नौ वर्षों तक रायगढ़ की युवराज्ञी का खून खौल गया। उन्होंने हरकारे से पूरा समाचार जान लेने का प्रयास किया। तब तक वहाँ खंडो बल्लाल, जोत्याजी केसकर, रायप्पा महार जैसे अनेक लोग एकत्र हो गये थे। रायप्पा अपना रोना रोक नहीं पा रहा था। "ऐसे स्वामी को छोड़कर मैं यहाँ आया ही किसलिए?" ऐसा कहते हुए वह जोर जोर से रोने लगा। महारानी को जब पता चला कि कविराज और महाराज को मालेघाट से लेकर गये हैं, उनका आश्चर्य और भी बढ़ गया। उन्होंने कहा, "नहीं नहीं ऐमा कभी नहीं हो सकता मालेघाट? उस भयानक जंगल से तो जाते हुए भूत प्रेत भी घबरा जाते हैं। ऐमी भयानक राह खान को मिलेगी ही कैसे?" "क्या कहें महारानीजी दाँत भी अपने और होंठ भी अपने।" "क्या हुआ ठीक-ठीक बताओ? यहाँ मेरी साँस अटक रही है।" "आपके-आपके भाई गणोजी शिर्के स्वयं मुकर्रबखान के साथ थे।" "नहीं, उस वीरान जंगल का रास्ता गणोजी को भी कहाँ पता है?" "उन्होंने ही राह दिखाने वालों की व्यवस्था की, भोजन और घोड़ों की व्यवस्था भी उन्होंने ही की थी। उनके सहयोगी गोवर्धन पन्त भी उनके साथ थे।" आँखों से गिरने वाले गर्म आँसू महारानी ने अपने पल्लू से पोंछ लिये। दूसरे ही क्षण उन्होंने हरकारे से पूछा, "धनाजी और सन्ताजी कहाँ हैं?" "महारानीजी कौन बता सकता है? महाराज पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा है, सभी ओर अफरातफरी मची है।" "परन्तु महारानीजी चिन्ता की बात नहीं है। धनाजी बहुत तेज बुद्धि के व्यक्ति हैं। वे सन्ताजी को लेकर यहीं आ रहे होंगे। आपकी आज्ञा लिए बिना वे कोई कार्य नहीं करेंगे।" खंडो बल्लाल ने कहा। 686 :: सम्भाजी