छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंइस भयानक समाचार से पूरा रायगढ़ थरथरा गया था। हर बुर्ज हर दरवाजे से निकलकर लोग राजमहल की ओर भागे आ रहे थे। राजमहल के सामने तीन-चार हजार लोगों की भीड़ एकत्र हो गयी थी। महाराजऽऽ शम्भू महाराज कहाँ चले गये आप? ऐसी दुखभरी चीखें और दहाड़ें अन्दर सुनाई पड़ने लगीं। बाहर की आवाजें सुनकर येसूबाई सँभल गयीं। उन्हें किसी बात का ध्यान आ गया। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा, "चलो खंडोबाऽऽ चलो ताराऊऽऽ।" वे सब महल के बाहर आ गये। सभी एक ऊँचे चबूतरे पर खड़े हो गये। महारानी को देखकर सभी ने एक साथ पूछना आरम्भ कर दिया, "महारानीऽऽ हमारे महाराज कहाँ हैं?" आक्रोश में उद्विग्न प्रजा को शान्त करने के लिए महारानी ने हाथ जोड़ लिये। उन्होंने कहा, "सुनिएऽऽ आपलोग इस प्रकार का हो हल्ला मत मचाइये। औरंगजेब के साथ हमारा युद्ध चल रहा है। युद्ध में तो आगा-पीछा होता ही रहता है।" "परन्तु महाराज? हमारे महाराज?" "घबराइये नहीं। एकाध बार क्षण पल के लिए कोई दाँव उल्टा पड़ गया तो इसका मतलब यह नहीं होता कि औरंगजेब जीत गया। अब शीघ्र ही रायगढ़ से सेना निकलेगी। हम शत्रु पर टूट पड़ेंगे। महाराज को औरंगजेब की मुट्ठी से ही नहीं यमराज के जबड़े के भीतर से भी निकालकर ले आएँगे।" उस समय वहाँ एकत्र हजारों की भीड़ ने महाराज और महारानी का जयघोष किया। उन्हें शान्त करते हुए येसूबाई ने कहा, "सैनिको! आप सभी अपनी-अपनी जगह पर चले जाइये। अपने पहरे, मोर्चे, बुर्ज आदि छोड़कर कहीं भी न जाइये। अधिक होहल्ला करोगे तो शत्रु का ही लाभ होगा।" जमा हुई भीड़ बिखरने लगी। राजाराम अपने बड़े भाई पर आये संकट से बहुत विह्वल हो गये थे। वे अधीर होकर पूछने लगे, "भाभीजी! हमें दुश्मन की मुट्ठी से छुड़ाकर ले आने वाले भाईसाहब स्वयं शत्रु के हाथ कैसे लग गये?" येसूबाई ने पूछा, "खंडोबा, कम से कम दस-पन्द्रह हजार की सुदृढ़ फौज तैयार करने में कितना समय लगेगा?" "यहाँ पाँच छह हजार की फौज है। परन्तु सामान इकट्ठा करना, शस्त्रास्त्र जुटाना भी आवश्यक है। शेष सेना तो स्वराज्य में जगह-जगह तैनात की गयी है।" "ऐसा कीजिए, सुधागढ़, सागरगढ़ और क्सिवारी के किले पर शीघ्रातिशीघ्र दूत भेजिए। सुबह नाश्ते से पहले यहाँ की फौजें पाचाड़ पहुँच जानी चाहिए।" "महारानी चिन्ता न करें। निश्चित समय पर बाँधणी के मैदान पर घास-दाने के साथ फौज तैयार रखूँगा। तब तक सन्ताजी और धनाजी भी आ ही जाएँगे।" सम्भाजी :: 687