छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"अब कहाँ से और कैसे छुड़ाएँगे हम उन्हें, महारानी ? परसों दोपहर में ही मुकर्रबखान ने श्यामगाँव की घाटी छोड़ दी। उसके साथ पचीस हजार की तैयार सेना है।" "अरे यह क्या हो गया ? महाराज हमारी आँखों से दूर चले गये।" ऐसा कहकर जोत्याजी केसकर और रायप्पा रोने लगे। अब तक बहुत आघात हुए थे। उनसे कभी न डरने वाली येसूबाई हताश दिखाई देने लगीं। वे घोड़े से नीचे उतर पड़ीं। दुखी मन से उन्होंने अपनी नजर चारों ओर घुमाई। आसमान बोझिल हो गया था। ऐसा लगा मानो दुखद समाचार सुनकर बादलों ने भी अपनी यात्रा स्थगित कर दी थी। महारानी की यह अवस्था देखकर धनाजी और सन्ताजी भी घोड़े से उतर पड़े। महारानी के सामने हाथ जोड़कर उन्होंने कहा, "महारानीजी आप चिन्ता न करें। हम फौज लेकर भागते हुए आगे जाएँगे और शत्रु के कब्जे से महाराज को छुड़ाकर ले आएँगे।" येसूबाई का गला भर आया। जैसे किसी व्यक्ति के कलेजे में कटार घुस जाये और उस पीड़ा को सहन करते हुए वह बोले, उसी तरह येसूबाई बोलीं, "ऐसा नही लगता कि इसका कुछ उपयोग हो सकेगा।" "क्यों ? महारानी क्यों? हमें आगे उड़ान भरने की आज्ञा तो दीजिए।" दोनों हठ करने लगे। "महाराज ने ही एक बार अपनी काव्यमयी शैली में एक दृष्टान्त बताया था। 'यक्ष किन्नरों का महत्त्व भगवान के दरबार में होता है। वे नीचे धरती पर आ जाते हैं तो मिट्टी के पुतले बन जाते हैं'।" "इसका अभिप्राय महारानीजी ?" "कराड़ से आगे पूरब का सारा प्रदेश समतल और बिना जंगल घाटियो का है। वहाँ अपना कोई दाँव नहीं चलेगा।" "ऐसा क्यों? हंबीरमामा की फौज ने तो बागलाण से लेकर कर्नाटक तक अपना घोड़ा दौड़ाया था।" "अचानक आगे बढ़कर आक्रमण करना, शत्रु को हैरान करना एक बात है किन्तु बादशाह की चार लाख की फौज से आमने सामने मुकाबला करना एकदम दूसरी स्थिति है।" वृद्ध अनुभवी लोगों और उत्साही युवकों का एकत्र विचार विमर्श हुआ। दुर्भाग्य से मुकर्रबखान अपने प्रदेश की सीमा पार करके कब का आगे निकल गया था। इस स्थिति को बिना समझे अन्धों की तरह आगे बढ़ते जाना सह्याद्रि के भीतर बने किलों को भी गँवा देना हो सकता है। महारानी ने कहा, "ऐसे समय में सम्भाजी . 693