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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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शब्दों में महाराज को चेतावनी दी—"शिवबा ! इस तरह का अपराध भविष्य में कभी मत करना। आप राजनीति करते हैं और हमारी जान निकल जाती है।" दो शृंगारपुर की मूसलाधार बारिश ऐसी थी कि चार हाथ की दूरी पर खड़ा व्यक्ति खुली आँखों से दिखाई नहीं देता था। एक बार वर्षा जंगल, पेड़, साग परिसर धोकर चली जाती थी, फिर घने कुहरे के पीछे खड़ा प्रचितगढ़ दुर्गम पहाड़ दिखाई देता था। ऊँचे पहाड़ से निकलकर नीचे की ओर घोड़े की तरह छलाँग लगाती तेज गति से बहती शास्त्री नदी, आसपास के झरने, बड़े-बड़े जल प्रपात और बहते हुए पानी का कल-कल छल-छल संगीत आदि से समृद्ध विलक्षण निसर्ग शोभा युवराज पर जादू का प्रभाव डालती थी, वे धन्य हो जाते थे। वर्ष में एक बार गौरी पूजा के त्योहार में मायके आयीं लड़कियों की तरह वर्षा की धाराएं चार महीने ऊधम मचाती रहती थीं। काव्यानन्द के नशे से दिमागी प्यास बुझ जाती थी। किन्तु शरीर में दौड़ने वाले पौरुषेय लहू का क्या करते। शम्भूराजा और कवि कलश में विचार विमर्श हुआ। व्यायाम के लिए पाँच बड़ी व्यायाम-शालाओं को निर्मित करने का निर्णय लिया गया। शम्भूराजा के शृंगारपुर आने का समाचार पूरे प्रभावली क्षेत्र में फैल गया था। इसलिए बहुत से तरुण युवक रोज़ ही उनके आसपास इकट्ठे होने लगे। दाभोल और राजापुर के बन्दरगाह से आने वाले फिरंगियों को नया समाचार मिल रहा था। वहाँ सात समुद्र पार राज्य की सेना पूरे बारह महीने तैयार रहती है। मराठा सैनिकों की तरह बारिश में चावल की खेती और ग्रीष्म तथा शीत में तलवार चलाने का काम नहीं करते थे। वहाँ के सैनिक सेना के लिए ही समर्पित रहते थे। सभी की अनुमति से निर्णय ले लिया गया। चेऊल, दाभोल और राजापुर बन्दरगाहों से मजबूत पीठ और अच्छी नस्लवाले हट्टे-कट्टे घोड़े खरीदे जाएँ और प्रभावली में स्वस्थ और साहसी जवानों को चुनकर कम से कम दो हजार सैनिकों का अश्वदल बनाया जाय। इस निर्णय पर सरदार विश्वनाथ ने पूछा, "युवराज ! शृंगारपुर में आपकी सेवा के लिए पाँच हजार की फौज के होते हुए यह अतिरिक्त सेना किसलिए?" सम्भाजी : 69