छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"हमारी यह नयी घुड़सवार सेना बहुत बहादुर होगी। हम इस विश्वास से इसका गठन करेंगे कि भविष्य में जहाँ भी ये घोड़े दौड़ लगाएँगे वहाँ श्रृंगारपुरी अश्वदल के नाम से पहचाने जाएँगे।" निर्णय के अनुसार योजना कार्यान्वित हो रही थी। अच्छे अच्छे नये घोड़े खरीदे गये। शम्भूराजा ने साधारण कुनबी बारा, बलूतेदार और अन्य समुदायों से परिश्रमी बहादुर युवकों को अपने आसपास इकट्ठा किया था। युवराज की सेना में युद्ध करने का अवसर मिलेगा यह सोचकर वहाँ के जवान बड़े उत्साह के साथ आगे आये। घुड़सवारों की नयी फौज तैयार होने लगी। दूर दूर की दौड़ आरम्भ हो गयी। सामने प्रतिचगढ़ की सीधी चढ़ाई बहुत कठिन थी। फिर भी ये जवान बड़े उत्साह से उस सीधी चढ़ाई पर दौड़ाते थे उस दुर्गम रास्ते पर चलते हुए घोड़े झुक जाते थे पसीने पसीने हो जाते थे। शम्भूराजा और कविराज कलश के अनुमान के अनुसार ही घटित हुआ। एक दिन रायगढ़ का सन्देश लेकर सरदार विश्वनाथ सामने उपस्थित हुए और दबी जबान में बोले—"युवराज राहूजी सोमनाथ का सन्देश आया है। उन्हें आपसे एक छोटा सा स्पष्टीकरण चाहिए।" "किस बात का?" "बड़े महाराज कर्नाटक में हैं। उनकी या राजगढ़ दरबार की अनुमति लिए बिना आप नयी सेना का गठन कैसे कर सकते हैं?" "क्यों नहीं कर सकते?" कवि कलश ने कहा। "कविराज, आप बीच में न बोलें।" "क्यों नहीं? हमारी ओर से वे ही बोलेंगे। वे हमारे गुरुबन्धु हैं, हमारे मन्त्री हैं।" युवराज ने कहा। विश्वनाथ का दर्प कुछ टूटा। कविराज ने कहा—"सरदार विश्वनाथ जी, आप बेहिचक रायगढ़ पर हमारा उत्तर पहुँचा दें। उनसे कह दें—'बड़े राजा ने राज्याभिषेक समारोह में शम्भूराजा को युवराज घोषित किया है। धर्म, परम्परा और प्रथा के अनुसार अष्टप्रधानों जितना ही उनका भी अधिकार है। अपने राज्य के हित में वे कोई भी निर्णय ले सकते हैं'।" सरदार विश्वनाथ ने सिर नीचे झुका लिया। वे जाने लगे तो युवराज ने उनके समीप जाकर कोमल वाणी में पूछा—"विश्वनाथ काका, इन कारकूनों के छल- कपट को क्या कहा जाए? इस प्रकार बार बार अपमानित करके ये लोग जानबूझकर मुझको क्यों सताते हैं? उनसे कहना कि यहाँ हमने अखाड़े शुरू किये हैं जनानखाने नहीं।" 70 :: सम्भाजी