भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 721, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 721

बहुत बढ़ गयी थी। पिछले दस वर्षों से दुर्गाबाई राजबन्दी के रूप में बादशाह की कैद में दिन काट रही थीं। औरंगजेब को पता था कि उसकी शहजादी को दुर्गाबाई और कमलजा से बहुत प्रेम था। उदयपुरी हों नवाबबाई हों या औरंगाबादी महल, इन सभी बेगमों की अपेक्षा औरंगजेब शहजादी जीनत की बात अधिक सुनता था। उसकी बात मानता था। यह बात सभी को मालूम थी। खाना खाते खाते जीनत ने बादशाह से पूछा, "अब्बाजान! उस सम्भा को जान से मारने का इरादा दिख रहा है आपका?" "अभी तक निश्चित नहीं है।" ऐसा कहते कहते बादशाह ने सावधान होकर पूछा, "क्यों? आपको क्या तकलीफ है?" "बस ऐसे ही अब्बाजान।" बादशाह कुछ अन्य कारणों से बहुत खुश था। उसने अपनी शहजादी से कहा "भरे बाजार में जैसे मुर्गा नचाया जाता है—लकड़ी का मुर्गा। वैसे ही शिवा के इस नापाक बच्चे को चौराहे चौराहे पर नचाएँगे। हो सकता है कि ये मरगट्ठे बगावत करके हमारे ऊपर आक्रमण करें।" "बगावत कैसी जहाँपनाह?" शहजादी के मुँह में खाना अटक गया। राजनीति के मामले में बोलना चाहिए कि नहीं? यह सोचकर शहजादी चुप हो गयी। किन्तु अपने को न रोक पाने के कारण फिर बोली "फिर भी अब्बाजान मुझे लगता है कि आपको रहम करनी चाहिए।" "कैसी रहम बिटिया?" "उस सम्भा को जिन्दगीभर के लिए कैदखाने की गन्दगी में फेंक दीजिए मगर उसे जान से मत मारिए।" "हूँऽऽ " औरंगजेब असन्तोष से बोला, "देखेंगे, लेकिन वह मूर्ख है बड़ा हठीला। टूट जाएगा मगर झुकेगा नहीं।" "अब्बाजान, जब आदमी हँसी-खुशी की जिन्दगी जी रहा होता है तब उसे कुछ अनुभव नहीं होता। मगर एक बार मौत का दरवाजा दिख जाये तो बड़े बड़े शैतान भी घबरा जाते हैं।" "नहीं, शहजादी, शिवा का यह छोकरा बड़ा जिद्दी है। हम तो इस जहन्नमी से पूरे हैरान हो गये हैं। इन दोनों बदमाशों का इतना बुरा हाल किया गया, नरक से भी ज्यादा तकलीफें दी गयीं। खुदकुशी करने का मन करता होगा, फिर भी दोनों झुकने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। वे अपना सिला हुआ मुँह खोलते हैं तो सिर्फ हमें शाप और गालियाँ देने के लिए।" "लेकिन अब्बाजान! दुर्गा, राणू और कमलजा जैसे उसके निकट सम्बन्धी सम्भाजी :. 719

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास) · पृष्ठ 721, कुल 793 में से · BharatKosha