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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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हमारे कैदखाने में हैं। उन रिश्तेदारों के माध्यम से अपनी बात क्यों नहीं कहलवाते आप? अपने खून से सम्बन्धित लोग मिलते हैं तो बड़े बड़े पहाड़ भी पिघल जाते हैं। सम्भा को तो लोग बताते हैं कि शायर है।'" औरंगजेब ने बड़े गर्व से अपनी शहजादी की ओर देखा। बादशाह का चेहरा दमक उठा। उसे पुराना इतिहास स्मरण हुआ। इसके पहले जब दुर्गाबाई और राणूबाई अहमदनगर के किले में कैद थीं, तब सम्भाजी ने अनेक बार दस दस, पन्द्रह-पन्द्रह हजार की फौज भेजकर अहमदनगर के किले को ध्वस्त करने की कोशिश की थी। इसीलिए उन राजबन्दियों को औरंगजेब ने हमेशा के लिए बहादुरगढ़ किले में लाकर रखा था। बादशाह अच्छी तरह जानता था कि अपनी पत्नी और बहन के प्यार में सम्भा पागल हो जाता है। अब यदि दस ग्यारह वर्ष के बाद शायद सम्भा के सामने उसके परमप्रिय व्यक्तियों को खड़ा किया तो? यकीनन सम्भा का फौलादी सीना पिघल जाएगा। राजगढ़ी से भी अधिक प्रिय अपने आत्मीय जनों से मिलने के लिए वह घायल पंछी की तरह तिलमिला उठेगा। ऐसी स्थिति में वह किसी भी सन्धिपत्र पर हस्ताक्षर कर देगा। उसे लगा कि सारी उलझन सुलझ गयी। बड़ी प्रसन्नता के साथ बादशाह जनानखाने से बाहर निकला। शहजादी के मुख पर हाथ फेरकर उदयपुरी बेगम बोलीं, "बिटिया, हजरत के सामने बात करने का साहस तुम्हें कैसे होता है?" "नहीं अम्मीजान, किसी का भी दुख देखती हूँ तो मेरा कलेजा दुख से मरोड़ने लगता है।" जीनत जब यह तो उसे अपनी बड़ी जेबुन्निसा की बड़ी याद आयी। जेबुन्निसा सलीमगढ़ के पीछे मरते दम तक कैद की यातना भोगती रही। जीनत की आँखों में पानी उतर आया। छह उस रात जीनतउन्निसा को लाख कोशिश करने पर नींद नहीं आ रही थी। अपने बाप की जिन्दगी का एक-एक चित्र उसकी आँखों के सामने उभर रहा था। "मेरा बाप एक कुशल और सजग राजनीतिज्ञ हो सकता है मगर उसकी जिन्दगी काली करतूतों से भरी पड़ी है।" वह बीती घटनाएँ स्मरण कर रही थी। लगभग पन्द्रह वर्ष पहले, सिखों के पाँचवें गुरु तेगबहादुरसिंह को औरंगजेब 720 :: सम्भाजी