भारतकोश
छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

पृष्ठ 723, कुल 793 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 723

ने बेहाल करके जान से मार डाला था। उसी क्रूरता से गुरु के शिष्य भाई मतिदास, सतीदास और दयालसिंह की दिन दहाड़े हत्या करवाई थी। उस घटना को सुनने वालों के शरीर अभी भी थरथराने लगते हैं। उन विषैली यादों से ज़ीनतउन्निसा बुरी तरह हैरान हो रही थी। दयालदास को दिन दहाड़े चाँदनी चौक में खौलते हुए तेल के कड़ाह में डाल दिया गया था। वह जानवरों की भाँति चीखते चिल्लाते, तड़प-तड़प कर मर गया। उसके शरीर की बची हुई चमड़ी अपने आप छिलकर नीचे लटक गयी थी। दयालदास की डरावनी लाश बादशाह ने बहुत दिनों तक चाँदनी चौक में लटका रखी थी। उस दिशा में भयभीत पंछी भूलकर भी उस ओर जाने का साहस नहीं करते थे। सतीदास की हत्या की कथा तो और भी अमानवीय थी। उसे चाँदनी चौक में एक खम्भे के साथ कसकर बाँध दिया गया था। सतीदास के पीछे एक और-एक हथियारबन्द व्यक्ति को खड़ा किया गया था। उनके हाथों में तेज नोंकवाले बघनखे लगाए गये थे। बादशाह के इशारे पर दोनों शैतान एक ही समय पर मतीदास के शरीर को फाड़ने लगे। जिस तरह कपड़े को फाड़ा जाता है उसी तरह उसका शरीर फाड़ा जा रहा था। उसके शरीर के मांस को खरोंच खरोंचकर निकाला जा रहा था। भयानक पीड़ा से तड़पता मतीदास जानवरों से भी ज्यादा जोर से चिल्ला रहा था। उसकी करुण चीत्कार न सह पाने के कारण दो महिलाओं को गर्भपात हो गया था। बादशाह के साथ कोई समझौता हो सके इसलिए शहजादी ने राणूबाई और दुर्गाबाई का मार्ग सुझाया था। किन्तु अपने बाप की क्रूरता का उसे पूरा अनुमान था। उस समय सतीदास का बघनखे से नोचा हुआ, खून से लथपथ जिन्दा शरीर उसकी कल्पना में बार बार उभर रहा था। दूसरे ही पल उसे अपने अब्बाजान की जगह हाथ में तेज कटार लिये एक नर राक्षस दिखाई देने लगा। यह सपना वह जागते हुए देख रही थी और पसीने से तरबतर होकर बिस्तर में तड़प रही थी।

सात

बारह वर्ष पहले बहादुरगढ़ किले में मियाँखान दुर्भाग्य से बन्दी बनाया गया था। दो बेटियों की शादी करने और उनका भविष्य सँवारने में सम्भाजी ने मियाँखान की सम्भाजी :: 721