छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअद्भुत सुख की अनुभूति हुई। सम्भाजी राजा दुर्गाबाई का हाथ अपने हाथ में लेते हुए बोले, "दुर्गा, एक स्त्री के रूप में, एक पत्नी के रूप में या एक इनसान के रूप में हम आपके लिए कुछ भी नहीं कर सके।" "महाराज, हमारे हिस्से में जो आया वह भी मेरे लिए बहुत था। शिवाजी महाराज की पुत्रवधू और सम्भाजी राजा की पत्नी होने पर जो आदर मुझे मिला, क्या वह कम है?" राणूदीदी कुछ आगे सरक आयीं और हड़बड़ी में पूछा, "क्या-क्या चाहिए उस दुष्ट राक्षस को?" "राणू दीदी! दुर्गा! बादशाह ने अनेक बार सन्देशा भेजा है कि वह आपलोगों के साथ मुझे भी छोड़ने को तैयार है।" "किन्तु इसके बदले में?" राणू दीदी और दुर्गाबाई ने एक साथ पूछा। "हमें अपने स्वराज्य के सारे किलेदारों को यहाँ बुलाकर, सभी किलों की चाभियाँ और उनकी हुकूमत बादशाह को सौंपनी होगी। हमें अपना यह मुल्क छोड़कर जाना होगा। हिन्दुस्तान के किसी दूसरे हिस्से में बादशाह हमें कोई खास जागीर देकर जिन्दगी भर के लिए ऐशो-आराम की सुविधा कर देगा। ऐसा आश्वासन वह मुझे दे रहा है।" "नहींऽऽ नहींऽऽ, बिलकुल नहीं, अपनी जान चली जाये तो भी अपना एक भी किला उसे मत दो।" दुर्गाबाई चिल्लाई। "अपने पिताजी की आन से पीछे न हटना।" राणू दीदी बोलीं। शम्भुराजा खिन्न मन से हँसते हुए बोले, "दुर्गारानी बादशाह की मेहरबानी से कितने दिनों के बाद हम मिल रहे हैं। उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें प्रसन्न करेंगे तो अपनी जान छूट जाएगी। अपने सुहाग की जिन्दगी काट सकेंगी आप।" दुर्गाबाई जोर से रो पड़ीं। रोते हुए व्याकुलता से उन्होंने सम्भाजी से कहा, "नहींऽऽ महाराज विनोद में भी ऐसा न कहें। हमारे पूज्य ससुर शिवाजी महाराज के स्वप्न और लक्ष्य के सामने मेरे सुहाग की क्या कीमत है? वैसे भी महाराज पिछले दस-बारह सालों में विधवा की जिन्दगी जीने की आदत पड़ गयी है। बची-खुची जिन्दगी भी काट लेंगे।" "सच है शम्भू बेटा। हमारी जान रहे या चली जाए, हमारी जान के मोह में ऐसा कोई समझौता न करना जिससे पिताजी के सम्मान को धक्का लगे।" राणू दीदी ने बड़ी गम्भीरता से कहा। इसी समय पहरेदार दरवाजे पर लकड़ी से ठोकने लगा। इस तरह समय समाप्त होने का संकेत देने लगा। वियोग की कल्पना से ही सभी का कलेजा हिल सम्भाजी 727