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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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गया। राणूदीदी, सम्भाजी राजा, दुर्गाबाई और कमलजा ने एक दूसरे को बाँहों में भर लिया। आवेग से व्याकुल एक दूसरे को चूमने लगे। 'पिताजीऽऽ पिताजीऽऽ' कहकर रोने वाली कमलजा के बरसते हुए आँसुओं को सम्भाजी राजा ने देखा। प्यार से विह्वल उन चार प्राणियों ने चूमते हुए एक-दूसरे के आँसू पी लिए। वे तीनों आँसूभरी आँखों से सम्भाजी राजा को देखते हुए धीमी गति से पीछे जाने लगे। इतने में एक कोने से कवि कलश की आवाज आयी, “राणू दीदीऽ।” उस आवाज को सुनते ही राणू दीदी चौंक गयीं। कविराज की ओर तेजी से गयीं और व्याकुल होकर बोलीं, “कविराज दुख में, सुख में और मौत के दरवाजे पर भी आपने हमारे प्यारे शम्भुराजा का साथ निभाया। अगले जन्म में हमारे शम्भुराजा के मित्र बनकर, नहीं तो हमारे सगे भाई बन जन्म लीजिएगा।” दुर्गाबाई और कमलजा ने कवि कलश के चरणों के दर्शन किये। कविराज का गला भर आया। वे गदगद होकर बोले, “दुर्गा भाभीऽ, राणूदीदी सह्याद्रि घाटियों और पहाड़ों में अभी भी औरंगजेब के विरुद्ध लड़ने वालों को हमारा यह सन्देश भेज दीजिएगा- फाँसी की फाँस गले से लगाय चले हम मौज की चाल सदाही जानि परै अजहूँ पग के तल लोहे की तेज सतेज गड़ाहीं लोभ नहीं जिनगी का कभी था पै हाथ पे होती जो हाथ खड़ग दुधारी साथ तुम्हारे महार ण में लड़ता नितही बन वीर जुझारी। " नौ उजाला हो गया किन्तु सूर्य कहाँ है? सम्भाजी हाथ लग गया किन्तु मराठों का प्रदेश क़ब्ज़े में कहाँ आया ? औरंगजेब की स्थिति विचित्र हो गयी थी। प्लेग के कारण औरंगाबादी महल उसे छोड़कर चली गयी थी। इसलिए वह कुछ बेचैन हो गया था। एक ओर जहाँ सम्भाजी के कैद करने की उसे प्रसन्नता थी वहीं दूसरी ओर शहजादा मुअज्जम को कैदखाने में बन्दी बनाना पड़ा था। शहजादा अकबर जैसा प्रिय शहजादा हमेशा के लिए उसे छोड़कर चला गया था। ईरान के बादशाह की 728 :: सम्भाजी