छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहजरत, जिस व्यक्ति ने भरे बाजार में शौहर का कत्ल कर दिया हो, उसकी सेज सजाते हुए जिन्दगी भर जुर्म सहने के लिए बहुत बड़े साहस की जरूरत होती है। किन्तु अब उसकी भी हद हो गयी है।" "लेकिन बेगम, ऐसा क्या हो गया?" "आपका कुत्ता शहाबुद्दीनखान, जो जिन्दगी भर बड़ी-बड़ी बातें करता रहा किन्तु सम्भाजी दाहिनी ओर से आता है ऐसा सुनकर बाई ओर भागने वाला चूहा। उसकी इतनी मजाल?" "क्या हुआ? बताओ तो सही—" बादशाह ने चिल्लाते हुए पूछा। "उस बुड्ढे शहाबुद्दीनखान ने आज सम्भा के पास सन्देश भेजा है—अपने किलों की चाभियाँ और कब्जे दे दो, नहीं तो भरे बाजार में तुम्हारी औरत पर नौकरों और गुलामों के लड़के छोड़े जाएँगे। उसकी इज्जत लूटी जाएगी।" "बस इतना ही? मुझे तो लगा आपके सिर पर आसमान ही गिर गया था।" बादशाह शान्त होकर नीचे बैठ गया। किन्तु उदयपुरी के क्रोध का पारा ऊपर चढ़ता गया। शहजादी क्रोध से काँपने लगी। उन दोनों को समझाते हुए बादशाह ने कहा, "कितनी चिन्ता करती हो? इतनी बहस करने का क्या कारण है? क्या कुत्ता और क्या कैदी? दोनों बराबर ही होते हैं।" अब तक उदयपुरी का क्रोध अपनी सीमा पर पहुँच गया था। वे बादशाह के सामने बैठ गयीं। वे जिन्दगी में पहली बार बादशाह से विवाद कर रही थीं। "वह दुर्गा—वह राणू केवल सम्भाजी की पत्नी और बहन नहीं हैं, वे शिवाजी की पुत्रवधू और बेटी हैं। शिवाजी ने जिन्दगी भर दंगाफसाद और खूनखराबा किया परन्तु किसी मुसलमान बहू-बेटी का स्पर्श नहीं किया। उनकी मृत्यु के पश्चात् स्वयं आपने शिवाजी की इस विशेषता की तारीफ की थी। वह सम्भा बड़ा बदमिजाज है, इश्कबाज है, दारूबाज हैं, इसकी साक्ष्य मराठों के बड़े-बड़े पंडित दे रहे हैं, किन्तु किसी मुसलमान ने ऐसी शिकायत कभी भी नहीं की। इसके विपरीत हर मुसलमान माँ-बहन को सम्भा ने अपने पिता की भाँति ही हमेशा इज्जत दी।" महिलाओं के इस आक्रमण से बादशाह सकपका गया। उसने तत्काल शहाबुद्दीन को सन्देशा भेजा कि वह अपनी अकल ठिकाने रखे। इससे बुड्ढा शहाबुद्दीन ठिकाने पर आ गया। दिन बीत रहे थे। महाड़ से जुल्फिकार पत्र पर पत्र भेज रहा था। आज अशनी सेना बिखाड़ी तक पहुँच गयी। कल अवचितगढ़ तक पहुँच जाएँगे। किले की तलहटी में घेरा डाल दिया है। इन पत्रों को पढ़कर बादशाह असदखान पर भड़कता था, "आपका बेटा मुझे नक्शा पढ़ने का तरीका सिखा रहा है क्या?" 730 :: सम्भाजी