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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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जुल्फिकार रायगढ़ पर सीधे आक्रमण करने से घबरा रहा था। महारानी के शरणागत होने के कोई चिह्न दिखाई नहीं पड़ रहे थे। बादशाह के चित्त को रंचमात्र भी शान्ति नहीं मिल रही थी। सम्भाजीराजा पर उसका क्रोध जरा भी कम न हुआ था। उसने खिन्नता से शहजादी से कहा, "जीनतऽ, उस पापी सम्भा को मुकर्रबखान द्वारा कैद किये आज बीस दिन हो गये। दाग जैसे सगे भाई को दो-तीन दिन में ही कत्ल करके जहन्नुम भेजने वाला यह शहंशाह औरंगजेब उस काफिर बच्चे को बीस दिन तक कैसे जिन्दा रखता है, इस कल्पना से अनुभवी लोग चकित होते हैं। शहंशाह डरपोक हो गया है ऐसा सोचकर बच्चे छुपकर हँसते हैं। मेरा मजाक उड़ाते हैं। बादशाह का ऐसा अपमान पहले कभी नहीं हुआ था।" "मेरे आका! आपके प्राण उस सम्भा में नहीं बल्कि मराठों के किलों में अटके हैं।" उदयपुरी ने कहा। "और नहीं तो क्या बेगम? कल को रामसेज की तरह एक एक किले को जीतने में छह-छह वर्ष लगेंगे तो इस प्रदेश को जीतने के लिए यह जिन्दगी कम पड़ जाएगी?" "अब्बाजान, तो आप स्वयं जाकर क्यों नहीं मिलते उस सम्भा से? जो तलवार से सम्भव नहीं है उसे आप जबान की मीठी कटारी से कर सकते हैं। आपके शब्दों की शक्ति मैंने अकबर भैया को लिखे गये आपके पत्रों में देखी है।" "किन्तु शहजादी हिन्दुस्तान का बादशाह बन्दीखाने में जाएगा? वह भी उस काफिर बच्चे से मिलने?" औरंगजेब के माथे की सिकुड़न भयंकर लग रही थी। दस एक दिन अपने महल में बादशाह शोर मचाने लगा, "सब के सब बेवकूफ हैं। कैसे पहरे करते हैं? किस तरह का बन्दोबस्त करते है? दुश्मनों के कुछ जासूसों के बहादुरगढ़ आने की खबर मिली है। उनकी इतनी हिम्मत होती कैसे है?" वह असम्भव घटना घटी है इसका विश्वास दिलाने के लिए औरंगजेब तूफान मचा रहा था। "उस करीमखाँ को बुलाओ। उस शैतान बगसद को बुलाओ। वह पागल दस्तगीरखान कहाँ चला गया?" औरंगजेब ने अपने दस बारह कर्मचारियों को रात में ही महल में बुलाया। पहरे में ढिलाई के कारण उनकी खूब फजीहत की। उनमें सम्भाजी 731