छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"अब्बाजान, अनेक फौजियों से यह हकीकत मैंने भी सुनी है।" शहजादी जीनतउन्निसा ने कहा। "गुस्ताखी माफ़ अब्बाजान, मुझे भी डर लग रहा है। सन्देह पैदा होता है। इतने-इतने बड़े युद्धों की आग झेलकर भी आप कभी डरे नहीं। आज अपने तीनों बलवान दुश्मनों को मिट्टी में मिला देने के बाद भी आपके चेहरे पर रौनक क्यों नहीं दिख रही है?" "बेटी कुतुबशाही और आदिलशाही को मिट्टी में मिला दिया। वे दोनों बादशाह हमारे कैदखाने में पड़े हैं। मरगट्ठों का सम्भा भी हमारे कैदखाने में पड़ा जंग खा रहा है। यह भी सच है। किन्तु मराठों की इस भूमि में शिवा और सम्भा ने ऐसा कोई सुरंगी बारूद भर रखा है, किसे पता? राजा के गिरफ्तार होने पर भी मराठों का राज्य समाप्त नहीं हुआ है। हमारे द्वारा भेजे गये जुल्फिकार जैसे सेनानी का हाथ अभी भी खाली है। जिस तरह पेड़ की चोटी पर बन्दर बैठते हैं वैसे ही प्रत्येक किले के संरक्षण के लिए बुर्ज बुर्ज पर मराठे हथियार लेकर बैठे हैं। सम्भा के गले में गिरफ्तारी की जंजीर बाँधे एक महीना हो गया पर उसकी महारानी, वह डाकिन येसूबाई रायगढ़ का कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं है। चाबुक मार मारकर कलश और सम्भा की पीठ छलनी कर दी फिर भी वे कोई भेद देने को तैयार नहीं। यह कैसी फतह है बिटिया?" बादशाह बहुत देर तक विचारमग्न बैठा रहा। बाद में उसने असदखान को अपने निजी कक्ष में बुलाकर कहा, "वजीरे आजम, इस बहादुरगढ़ की जगह ही अशुभ है। यहाँ के महल गर्क होते हैं। यहाँ की जमीन खोदो तो शरीर पर कीड़े उड़ते हैं। यह फतह मिलने पर भी फतह की खुशी हासिल नहीं होती।" "हुजूर?" "हाँऽ, असदखान। कल ही यहाँ से डेरे डंडे बाहर निकालिए। अपने दोनों राजबन्दियों को कड़े बन्दोबस्त में साथ ले लो।" "लेकिन जहाँपनाह, जाना कहाँ है? उनके अनुसार आदेश दूँ।" "पुणे के आसपास।" दूसरे दिन बादशाह के कुछ लाख घोड़े और सैनिक भीमा नदी के किनारे किनारे ऊपर की ओर सरकने लगे। कोरेगाँव और तुलापुर के बीच छावनी बनाने का बादशाह ने निश्चय कर लिया था। उसका विचार था कि पूना के पास पहुँचकर पूना और चाकण के क्षेत्र पर आक्रमण किया जाए। उसके धूर्त मस्तिष्क में इस तरह के विचार सक्रिय थे। उत्तरी कोंकण में उतरने से बादशाह की दहशत फैलने वाली थी, जगह बदल जाने से घोड़े और सैनिक भी कुछ चैतन्य हो जाने वाले थे। बादशाह को यह भी समीप से देखने का अवसर मिल जाता कि जुल्फिकार वहाँ कोंकण में कौन-सा खेल खेल रहा है? सम्भाजी 743