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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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हरजी राजा का सन्देश आया, "महल से निकलकर तुरन्त पूना के लिए प्रस्थान करना पड़ेगा। विचार-विमर्श के लिए फ़ौरन ऊपर आइए। आपकी राह देखते हम दरवाजे पर ही खड़े हैं।" तब वृद्ध केसो त्रिमल जिंजी का वह किला चढ़कर ऊपर आये। पसीने से तरबतर हरजी महाड़िक के सामने खड़े हो गये। हरजी प्रसन्न मुद्रा में झूले पर बैठे दिखे। दालान के कोने से किसी की रोने की आवाज आ रही थी। सम्भवतः वह आवाज अम्बिकाबाई की होगी। आखिर शम्भुराजा उनके छोटे भाई थे। केसो पन्त कुछ हड़बड़ाए हुए से सामने रखे आसन पर बैठने लगे। उसी समय कोने में खड़े अपने सिपाहियों को संकेत किया। आठ दस लोग केसोपन्त पर टूट पड़े। उन्हें बन्दी बनाकर कैदखाने की ओर ले जाया गया। केसोपन्त की वफादार आत्मा आहत हुई और अपमान से उनका चेहरा लाल हो गया। मराठों का राजा दूर अपनी मातृभूमि में कैद हो गया। उसकी मदद के लिए दौड़कर जाने के बदले हरजी राजा जैसा व्यक्ति, राजा का सगा बहनोई इस प्रकार का धोखा करेगा, ऐसा तो त्रिमल ने स्वप्न में भी नहीं सोचा था। हरजी राजा ने केसो त्रिमल को ले जाते हुए देखा। हरजी प्रसन्नता से हँसे। महाड़िक के कर्मचारी लेखन सामग्री लेकर पहले से ही बैठे थे। हरजी राजा औरंगजेब को पत्र लिखवाने लगे। "ऊपर ईश्वर की महिमा का आसमान और नीचे बादशाह मेहरबान। यही सत्य स्थिति है। इसे हम भली प्रकार जानते हैं। आपने जिस प्रकार हमारे साढ़ू भाई गणोजी शिर्के और महादजी निंबालकर पर दयाभाव रखा है वैसी ही कृपा हमारे ऊपर भी रखिए। यद्यपि हम शिवाजी के जामाता हैं फिर भी हमारा सिर उनके पुत्र सम्भा की तरह फिरा नहीं है। कहने का मकसद यह है कि आप हम पर कृपा करके बादशाही की सेवा का देवदुर्लभ अवसर प्रदान करें।"

पन्द्रह

रायगढ़ पर शोक की लहर फैली थी। दस वर्ष पूर्व शिवाजी महाराज के आकस्मिक निधन से राजधानी को भूकम्प का झटका लगा था। अब दस वर्ष बाद मुगलों द्वारा सम्भाजी राजा को जीवित पकड़ा गया था। हिन्दवी स्वराज्य को यह दूसरा भीषण झटका लगा था। सम्भाजी राजा जैसे ध्येय धुरन्धर रणवीर और कर्तव्यपरायण राजा सम्भाजी 747