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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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लेकर चले गये। उनके डगमगाते पैरों का बादशाह की छावनी तक पहुँचना सम्भव ही नहीं था। रास्ते में इन लोगों के बीच घुसर-फुसर चल रही थी। वे सोच रहे थे कि औरंगजेब के भयंकर धक्के के सामने महारानी भी कितने दिन जी पाएँगी। चलते हुए ये महानुभाव अपनी अन्नदात्री महारानी के सम्बन्ध में इस प्रकार की चर्चा कर रहे थे। राज्य की सीमा पर पहुँचकर उन चोरों ने सारा द्रव्य आपस में बाँट लिया और वहाँ से अपने इष्टमित्रों अथवा व्यापार स्थलों पर चले गये। शम्भूराजा के अमानवीय जुलूस, उनके साथ दुर्दैवी घात आदि की कथाएँ राजधानी तक पहुँच रही थीं। इस समय सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि इस अनिश्चय की स्थिति को कितने दिन झेला जा सकता है ? इस भयानक व्यूह रचना से बाहर निकलने का उपाय कैसे ढूँढ़ा जाए ? कौन-सी योजना बनाई जाए ? प्रहलाद निराजी, येसाजी कंक, रामचन्द्र पन्त जैसे वरिष्ठ अनुभवी लोग इसी उधेड़बुन में व्यस्त थे। प्रायः सभी इस बात पर सहमत थे कि इस प्रकार की भ्रामक और अनिश्चित परिस्थिति में महारानी का रहना ठीक नहीं था। महारानी भी आखिर कितने दिनों तक राज्य का कार्यभार संभाल सकती थीं ? “सच बात तो यह है कि रायगढ़ के सिंहासन को रिक्त रखना किसी के भी हित में नहीं है।” येसाजी ने अपना स्पष्ट मत व्यक्त किया। येसूबाई, राजाराम साहब और ताराबाई की ओर मुखातिब हुईं। उन्होंने पूछा, “आप लोगों की क्या राय है?” “दादाजी महाराज पर बुरा समय आया है। राज्य पर उनके अनेक उपकार हैं उनकी जीवन्त यादगार के रूप में उनके चिरंजीव बालक शाहू को गद्दी पर बिठा दीजिए। हम हर प्रकार से उनके पीछे खड़े रहेंगे।” राजाराम साहब ने अपना मत व्यक्त किया। अधिकारी वर्ग के दुष्ट तत्त्व यद्यपि समाप्त हो चुके थे किन्तु ईर्ष्या-द्वेष की प्रवृत्ति अभी समाप्त नहीं हुई थी। राजाराम साहब ने अपना बड़प्पन दिखाया था। किन्तु अनेक लोग आपसी रिश्तों की बुनियाद पर ईर्ष्या की आग भड़काने के लिए फूँक मारने में लगे थे। महारानी येसूबाई ने कहा, “सन्तुलित और मूल्यनिष्ठ विचार से ही राज्य चल सकता है। छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए जूझना हमें शोभा नहीं देगा। भोंसले खानदान की तीन-तीन पीढ़ियों को उजाड़ने वाले औरंगजेब जैसे सबल शत्रु का एकजुट होकर मुकाबला करना सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है।” “इसलिए हम अपने बालशाहू का राज्याभिषेक शीघ्रातिशीघ्र कर लें।” सभी ने एक साथ मत व्यक्त किया। “नहींऽऽ!” धीमे किन्तु दृढ़ स्वर में महारानी ने असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा, “सात वर्ष के बाल शाहू की अपेक्षा राजाराम साहब अधिक समझदार 750 :: सम्भाजी