छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 766, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्रूर शैतानी दृश्य को देखने से बचने के लिए प्रकाश अँधेरे की ओट में भागा जा रहा था। आज कुछ जल्दी ही सूर्यास्त हो गया था। कहीं से कुत्तों के रोने की आवाजें आ रही थीं। सम्भाजी राजा 'जगदम्ब, जगदम्ब' का जाप कर रहे थे। आँखों के कोटर में नेत्रकमल नहीं थे। किन्तु राजा के मन की आँखों के सामने अनेक दृश्य झिलमिलाने लगे थे। पुरन्दर पर तेज बरसाती धाराएँ, हिन्दवी स्वराज्य के छत्रपति के पुत्र के रूप में जन्म लेना, वहाँ का आनन्दोत्सव, उस गोरे-चिट्टे तेजस्वी बालक का पालने में सुलाया जाना, सोने की जंजीरों से लटकते पालने का हल्के से झुलाया जाना। जीजामाता और सोयराबाई का मधुर गीत— सोजा, सोजा शम्भू बाल शिवबा के प्राण पियारे लाल सोजा सोजा शम्भू बाल। पास पलंग पर रुग्णावस्था में सईबाई बैठी हैं। अपने श्रान्त नेत्रों से गोर चिट्टे राजकुमार को बड़े प्यार से देख रही हैं। वे बाणकोट की खाड़ी की लहरें। शिवाजी महाराज के कन्धों का सहारा लेकर तैरते राजकुमार सम्भाजी अपनी बालपन की कोमल काय पर वस्त्रालंकार संभालते, बादशाह की नजरों में सीधे देखते केवल नौ वर्ष के राजकुमार, शृंगारपुर में शिक्षा ग्रहण करते हुए अपनी सहपाठिनी येसूबाई के साथ की गयी ठिठोलियाँ, बुरहानपुर से दक्षिण में कावेरी की धारा में धँसे त्रिचनापल्ली किले की दीवारें, सह्याद्रि के साथ ही दक्षिण की प्रत्येक घाटी में देश, धर्म और मिट्टी के लिए हजारों साथी, अकाल की चिन्ता न करने वाले त्रस्त जानवर, पेट-पीठ एक हो जाने पर भी बादशाह के विरुद्ध खड़े रहने वाले तलवार और भालों से सुसज्ज बहादुर, आठ वर्षों के निरन्तर संघर्ष में मृत्यु पाने वाले असंख्य घोड़े। क्या कुछ नहीं याद आ रहा था, सम्भाजी राजा को? सम्भाजी बादशाह की कोई भी बात सुनने को तैयार न थे। यह देखकर वह भयंकर रूप से क्रुद्ध हो गया। उसने फर्सियाँ लेकर खड़े दल को एक ओर कर दिया। हाथों में बघनखा पहने दूसरा दल पास ही तैयार खड़ा था। बादशाह ने उनकी ओर इशारा किया। इशारा पाते ही वे आगे दौड़ पड़े। शम्भूराजा को खम्भे के साथ बाँध दिया गया था। दो हट्टे कट्टे राक्षस आगे बढ़े। एक ने पीठ की ओर ऊपरी मनके के पास और दूसरे ने आगे से गले के पास बघनखे घुसा दिए। उन राक्षसों को प्रोत्साहित करने के लिए ढोल-नगाड़े जोर-जोर से बजाए जाने लगे। वे दोनों 'दीनऽऽ—दीनऽऽ' करके चिल्लाने लगे। वे राजा के अंग में घुसे बघनखों को जोर 764 :: सम्भाजी