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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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धर्म का उद्धार करने धरती पर। जग त्राता ने अवतार लिया है। होने दो जयनाद शिवा दुन्दुभि का।।। चार उस रात युवराज कुछ जल्दी बिस्तर में चले गये थे। महल के चारों ओर घना अँधेरा छाया था। शृंगारपुर मानो सामने के पहाड़ों को तकिया बनाकर सोया था। बगल के घने पेड़ों से रह-रहकर लाल किरणें दिखाई पड़ती थीं। इससे पहरेदारों के हाथों की मशालें लहराने का आभास होता था। ऐसा लगता था जैसे जंगल में बैताल की पालकी चल रही है। थोड़े ही समय में महल के बाहर एक साँड़नी सवार कुछ घुड़सवारों के साथ आकर रुके। अचानक आये मेहमानों और दरवाजे पर बैठे कर्मचारियों के बीच धीमी आवाज में कुछ बात चल रही थी। उनके ठीक बाद कवि कलश का घोड़ा आकर रुका। कविराज ऊपर कमरे में पहुँचे उसके पहले ही युवराज ने वस्त्र धारण कर लिए। घर में रखी कौड़ियों की माला पहन ली और अपने वस्त्राभूषण ठीक करते हुए द्वार पर आ पहुँचे। वहाँ तेज दीपकों के प्रकाश में चार पाँच लोग बैठे थे, सफेद दाढ़ी वाला लगभग पचास वर्ष का एक मुसलमान युवराज की प्रतीक्षा कर रहा था। उसकी प्रत्येक गतिविधि पर कवि कलश अपनी सूक्ष्म दृष्टि टिकाए हुए थे। युवराज द्वार पर उपस्थित हुए तो सभी लोग उठकर खड़े हो गये। सभी ने युवराज का अभिवादन किया। संभाजी राजा ने बैठते हुए कवि कलश से आँखों के संकेत से पूछा। कविराज ने संकोच में कहा, "दिलेरखान के यहाँ से एक लिफाफा आया है।" कवि कलश की बात सुनकर शम्भुराजा ने एक गहरी साँस छोड़ी। उन्होंने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। वे चुपचाप बैठे रहे। दिलेरखान कोई सामान्य व्यक्ति नहीं था। गंगा यमुना से लेकर भीमा कावेरी तक अनेक नदियों का पानी पिया हुआ साठ साल का अनुभवी बुड्ढा था। इस प्रकार का कुशल सरदार दो वर्ष पूर्व दक्षिण का सूबेदार बनकर आया था। तभी से वह संभाजी राजा से मित्रता करने का प्रयास कर रहा था। शम्भुराजा ने कौड़ियों की माला हाथ में लेकर मन में ही मन्त्र का जाप किया। सम्भाजी 75