छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउन्होंने दिलेरखान द्वारा दी गयी लिफाफे की थैली खोलकर देखी। अन्य लोग कमरे से निकलकर बाहर चले गये। शम्भूराजा ने कवि कलश को लिफाफा देकर पढ़ने के लिए कहा। कविराज की नजर उस सुन्दर हस्तलेख पर घूमने लगी। "राजाधिराज, शेरसमशेर, संभाजी राजा भोसले।" कोई व्यक्ति जब मित्रता के लिए अपना हाथ बढ़ाता है तो उसके मन का शत्रुता वाला ग्रंथिजाल जलकर खाक हो जाता है। यह बात हम आप जैसे शायर मराठा शहजादे को हम क्या समझाएँगे। किन्तु आप भी इस बात को गाँठ बाँध लीजिएगा कि कमल के सुन्दर फूल केवल तालाब में ही खिलते हैं। शेर का बच्चा जंगल में ही शोभा पाता है। इस सम्बन्ध में हम आपसे सवाल करना चाहते हैं कि मराठी राज्य के योग्य शहजादे होते हुए भी श्रृंगारपुर की अँधेरी गुफा में अपने को बन्द करके आप क्यों बैठे हैं? "रायगढ़ के अपने हक से वंचित होकर आप विस्थापित हैं। शेर शिवाजी जैसे पिता के होने पर भी आप प्यार के लिए यतीम हो गये हैं। आपके दिल की धड़कन हम जान गये हैं। आजतक आपने मुसलमानों की सिर्फ दुश्मनी के बारे में सुना होगा, दोस्ती के बारे में नहीं। हमारी दोस्ती की कोशिश को ठुकराना नहीं। आप पर जो तकलीफ आये मुझे सूचित करना, हमें आधी रात को जगा देना। उम्र और तजुर्बे की परवाह किये बिना यह बन्दा आपकी सेवा में हाजिर हो जाएगा।" कवि कलश का चेहरा उतर गया। उनसे पत्र का अगला भाग पढ़ा नहीं जा रहा था। शम्भूराजा मन ही-मन मुस्करा रहे थे। स्वयं को रोकने का प्रयास कर रहे थे। किन्तु पानी के बाँध की तरह उनकी हँसी बेकाबू हो गयी। वे पेट पकड़कर हाः हाः करके हँसने लगे। दुष्ट और अनोखा सूबेदार शेर शिवाजी के पुत्र को ही प्यार मुहब्बत का न्योता दे रहा है। इसकी कल्पना ही कितनी उपहासास्पद है। युवराज के साथ ही कवि कलश भी जोर जोर से हँसने लगे। येसूबाई दौड़ते हुए आकर दरवाजे के पास खड़ी हो गयीं। पत्र के सन्देश से पूरे महल में एक अप्रिय सन्नाटा फैल गया। पत्र का उत्तर पाने के लिए दिलेरखान के दूत महल के बाहर रुके हुए थे। दूसरे दिन दोपहर हो गयी। दिलेरखान के दूतों से श्रृंगारपुर की तेज गर्मी सहन नहीं हो रही थी। उन्होंने शम्भूराजा से बार बार पूछना शुरू किया। तब युवराज दूत पर बरसते हुए बोले, "जाओ और अपने दिलेरखान से कहो कि छत से गिरे पानी का वापस छत पर चढ़ना जितना असम्भव है, नदी का सागर की बाँहों में समाने के बदले साँप की तरह उद्गम की ओर जाना जितना असम्भव है, उतना ही किसी मुसलमान सूबेदार के लिए शिवाजी महाराज के पुत्र से मित्रता की इच्छा 76 :. सम्भाजी