छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऔरंगजेब उदास स्वर में बोला, "अरे बेवकूफोऽ कैसा जश्न मना रहे हो? मारने वाला मर गया और मरने वाला अमर हो गया। जिसने कत्ल किया वह मर गया, जिसका कत्ल हुआ वह अमर हो गया।" उन्नीस भूकम्प के बाद के उजड़े हुए कुरूप दिन की तरह वह भयानक दिन था। भीमा के तट पर कोरेगाँव परिसर में अनेक गाँवों में डरावना सन्नाटा पसरा हुआ था। छह सात गाँवों के बाहरी हिस्से में फैला, तीन-साढ़े तीन लाख का फौजी खेमा दिन में भी झपकियाँ ले रहा था। संगीत और गायन-वादन के विरोधी बादशाह ने मौज मस्ती की खुली छूट दे दी थी। काफिरों के निपात के उपलक्ष्य में रातभर गाना बजाना चलता रहा। आज सवेरे देर से बादशाही खेमा जगा। वढू गाँव की स्थिति अन्य गाँवों से अलग थी। कल शाम को शम्भुराजा की नृशंस हत्या की खबर कुछ ही लोगों को थी। शेष गाँव के हट्टे कट्टे युवक अपने घरों में घायल होकर पड़े थे। दो दिन पहले ही बादशाही फौज के हत्यारे सैनिकों ने घरों में घुसकर उन्हें बुरी तरह पीटा था। पिछले पाँच-छह दिनों से गाँव में शाही फौज के घोड़े आते थे और खड़ी फसल में घुसकर उन्हें तहस-नहस कर देते थे। विशेष रूप से रूहूल्लाखान के खेमे के घोड़े खुले छोड़े जाते थे। इस ध्वंसलीला के कारण गाँव के लोग बहुत चिढ़ गये। युवकों ने लाठियाँ लेकर घोड़ों को मार भगाया। घोड़ों का झुंड नदी पार चला गया। इससे रूहूल्लाखान बहुत क्रुद्ध हुआ। उसी रात रूहूल्लाखान के दो-तीन सौ सैनिकों ने वढू गाँव पर आक्रमण कर दिया। काफिरों के युवकों का यह प्रतिशोध उससे सहन नहीं हुआ। सैनिकों ने घरों में घुसकर युवकों, बूढ़ों आदि सभी को खींच-खींचकर बाहर निकाला और चौराहों पर लाकर उन्हें मारते-मारते बेदम कर दिया। इस बात को अभी दो ही दिन हुए थे। युवकों का घायल शरीर उनका साथ नहीं दे रहा था। लोग आहत और विवश अपने घरों में पड़े थे। बादशाह के विरोध में शिकायत करें भी तो किससे? वे अपनी मार की असह्य पीड़ा झेलते हुए, अपने झोपड़ों की आड़ में निढाल पड़े थे। दोपहर बीती। गाँव के दामाजी पाटील के बाड़े से धोने वाले कपड़ों का बड़ा 768 :: सम्भाजी