छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयात्रा आरम्भ हो गयी थी। उसके साथ दामाजी ने चार बार यात्राएँ की थीं। गोविन्द नाक ने अपने जीवन में शम्भूराजा की बहादुरी की असंख्य कहानियाँ सुनी थीं। उसका सगा मौसेरा भाई रायप्पा नाक अपने भाई के साथ बहादुरगढ़ की ओर निकल गया था। उसे शम्भू महाराज से मिलना था। परन्तु वे दोनों भाई लौटकर नहीं आये। वहीं कहीं शहीद हो गये। शिवाजी और सम्भाजी के साथ सारे गाँव का ऐसा ही आत्मीय रिश्ता था। इसलिए सभी छोटे-बड़े तिलमिला रहे थे। आज का यह प्रसंग बहुत जटिल था। सभी की बातें सुनकर दामाजी पाटील ने निर्णायक स्वर में कहा, "भाइयो, शम्भू महाराज के लिए आप लोगों की अपेक्षा मेरे दिल में अधिक दर्द है। पर करना क्या है? गाँव के सामने ही तीन-चार लाख की फौज का घेरा लगा हुआ है। बादशाह की शक्ति असीम है। बादशाह ने फरमान जारी किया है कि शम्भू महाराज के रक्त-मांस को किसी को छूना नहीं है।" "सच है पाटील, आज दिनभर आसपास के दस गाँवों के लोग दिनभर घर से बाहर नहीं निकले। सभी भयभीत होकर सोच रहे हैं कि बादशाह के साथ बेवजह पंगा क्यों लिया जाए? अपने गाँव के साठ-सत्तर युवकों को चार दिन पहले सैनिकों ने इतना पीटा है कि उन युवकों ने अभी भी बिस्तर नहीं छोड़ा है। अब फिर गाँव में नयी मुसीबत नहीं चाहिए। पाँच कोस के क्षेत्र में अन्य सभी गाँव चुपचाप बैठे हैं तो हम ही क्यों यह आफत मोल लें?" भोजन का समय हो गया था। गाँव के पाटील ने अपना निर्णय सुना दिया। गाँव वाले अपने अपने घरों को लौट गये। वे रोटी खाकर बिस्तर में जाने की तैयारी करने लगे। किन्तु जना धोबिन बड़ी साहसी महिला थी। राधाबाई पाटील के साथ उसकी घनिष्ठ मित्रता थी। जना आज अपना दाना पानी भूलकर राधाबाई के बाड़े में ही बैठी थी। राधाबाई ने भोजन परोसते समय पुनः पाटील से निवेदन किया, "शम्भू महाराज के लिए कुछ तो कीजिए जी?" राधाबाई ने बहुत आग्रह किया किन्तु मुगल सेना के विरुद्ध खड़े होने की दामाजी की इच्छा न थी। अन्ततः बाड़े में राधाबाई और जना ही बैठे रह गये थे। राधाबाई ने गोविन्दा के द्वारा गाँव की महिलाओं को सन्देश भेजा। सन्देश पाते ही गाँव की माताएँ, बेटियाँ आदि पाटील के बाड़े में इकट्ठा हो गयीं। गाँव की उन महिलाओं को हाथ उठाकर जना ने सम्बोधित किया, "इतनी निर्दयता? दुनिया पर क्या पानी पड़ गया है? अपने गाँव के एकदम पास शम्भू महाराज के मांस के लोथड़े इस तरह क्यों पड़े रह जाएँ? पाटीलबाई, मैं तो कहती हूँ कि हमारे पूर्वजों ने पिछले जन्मों में जरूर बड़े पुण्य किये होंगे। इसीलिए तो शिवाजी महाराज का बेटा हमारे गाँव की सीमा की गोद में सोने के लिए इतनी दूर आ गया।" सम्भाजी :: 771