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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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हुए पाटील हड़बड़ी में बाहर आ गये। वे गुर्राये, "भगवान यह क्या बचपना चला रखा है? बादशाह गाँव पर गधे का हल चलाएगा तब पता चलेगा आपको।" "देखिए जी! शिवाजी महाराज के बेटे का मांस चील और गिद्धों को देने से पहले यदि हम मर जाएँ तो क्या बुरा है? ऐसा गाँव और ऐसा जीवन चाहिए किसलिए? संभालिए अपना गाँव और घर। हम तो चले।" राधाबाई पाटील ने हाथ में भाला ले लिया और बाड़े से तीर की तरह बाहर निकलीं। उनके साथ जना धोबिन और हाथ में कमंडल लिये गोरखनाथ बाबा निकले। साथ बढ़ूगाँव की सारी स्त्रियाँ भी निकल पड़ीं। गाँव की सीमा पार कर सब नदी की ओर दौड़ने लगीं। आगे आगे हाथ की लाठी नचाता गोविन्दा नाक था। नदी का किनारा समीप आने पर स्त्रियाँ बड़ी सावधानी से नदी कछार उतरने लगीं। वे नहीं चाहती थीं कि शाही फौज को इसकी भनक लगे। आसमान में घना अँधेरा था। महिलाओं ने सहजभाव से पीछे मुड़कर देखा। गाँव के सारे पुरुष उनके पीछे दौड़ते हुए नदी के किनारे आ गये थे। उनमें दामाजी पाटील भी थे। जो लड़के घायल हो गये थे, उनमें से भी कुछ बड़े उत्साह से लँगड़ाते हुए पीछे-पीछे दौड़ते आ गये थे। दगामस्ती मौज मजा करने के बाद, बादशाह के सैनिक देर से सोये थे। इसलिए उन्हें गहरी नींद आ गयी थी। गाँव वाले दुबके-दुबके नदी का पाट पार किये। दूसरे किनारे पहुँचकर गाँव वालो ने माचिस कांडी जलाई। उसके फुरफुरे प्रकाश में नदी का किनारा प्रकाशित हो गया। शम्भू महाराज के कान, हाथ पैर के टुकड़े जैसे एक-एक अवयव मिलने लगे। गाँव वालों ने अपनी धोतियाँ खोलीं और शम्भूराजा के मांस के टुकड़ों को उनमें इकट्ठा किया। अपना काम कर लेने के बाद सभी ग्रामीण झपाटे से वापस लौटे। वे गाँव की चौपाल पर वापस पहुँच गये। लड़के अपने घरों की ओर भागे। कोई उपले लेकर आया तो कोई लकड़ी लेकर आया। दाहक्रिया की पूरी तैयारी की गयी। किन्तु कठिन प्रश्न यह उपस्थित हुआ कि किसकी जगह में चिता रचाई जाए? दामाजी पाटील तो अपनी सारी जमीन निछावर करने को तैयार था किन्तु उसकी जमीन कोसभर की दूरी पर थी। गाँव के अन्य जमीन मालिक घबरा रहे थे उन्हें भय था कि कल बादशाह के कर्मचारी आकर उनकी गर्दन पकड़े तो? अमीरों का वह पाखंड गोविन्दा से सहन नहीं हुआ। वह आगे बढ़कर अपनी जमीन दिखाते हुए बोला, "आइए, इधर आइए। यह हम महारों की जमीन है। यहीं सम्भाजी :: 773