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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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भीमा की धारा की ओर देखते हुए गोरखनाथ बाबा ने हाथ जोड़ लिए। श्रद्धाभाव से उन्होंने धारा की वन्दना की। बाबा के आसपास गाँव के लोगों की भीड़ जमा हो गयी थी। बाबा गदगद स्वर में बोले- “गाँववालों यह बात सच है। तुम्हारे पूर्वजों के महान पुण्यों के कारण ही शिवाजी महाराज का यह पराक्रमी बेटा चिरनिद्रा में लीन होने के लिए, तुम्हारे गाँव की मिट्टी की गोद में आया। उधर उस इन्द्रायणी को देखिए। कुछ वर्ष पहले कुछ दुष्ट समाज कंटकों ने तुकोबा माउली की अभंग गाथा को उसकी धारा में डुबो दिया था। कहते हैं कि स्वयं माता इन्द्रायणी ने उसे पानी के बाहर निकाल दिया। उसी प्रकार काल के भीतर समायी हमारे शिवपुत्र की पराक्रम गाथा को ऊपर आने में कितने वर्ष लगेंगे, किसी को भी ज्ञात नहीं। किन्तु आज, कल, परसों, नरसों या कुछ शतकों के बाद ही क्यों न हो, वह ऊपर आएगी अवश्य। क्योंकि सत्य से अधिक शाश्वत चीज संसार में दूसरी नहीं है। जब कभी भ्रम और अफवाहों के पर्दे फाड़कर वास्तविकता समाज के सामने अपने सही रूप में आएगी तब देहू और आलेंदी की तरह इस बढ़ गाँव में भी मेले लगेंगे। देश के लिए, धर्म के लिए, मिट्टी के लिए और स्वाभिमान के लिए मृत्यु को गले लगाने वाले इस वीर पुरुष की समाधि के दर्शन करने के लिए, इस शक्ति-स्थल की ओर दुनिया दौड़ेगी।” सम्भाजी . 775

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