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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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सम्भाजी : यथार्थ और अयथार्थ

  1. सम्भाजी के व्यक्तिचित्र को धूमिल, अवास्तविक और विकृत बनाने का आरम्भ मल्हार रामराव चिटणीस ने किया। ये बालाजी आवजी के वंशज थे। उन्होंने यह विवरण सम्भाजी महाराज की मृत्यु के एक सौ पचीस वर्ष बाद लिखा। उनके पूर्वज बालाजी आवजी और उनके पुत्र आवजी को हाथी के पैर के नीचे कुचलवाकर मार दिया गया था। इसका दुख मल्हारराव के मन में पहले से ही था। यह इतिहास लेखन वस्तुतः उसी प्रतिशोध का परिणाम था।
  2. मल्हारराव ने अपना अधिकाधिक असन्तोष कवि कलश को लेकर व्यक्त किया है उनके अनुसार उस अघोरी कापालिक के कारण ही राजा और राज्य के लिए खतरा पैदा हुआ। यही उनका प्रमुख अनुमान है। परन्तु सम्भाजी राजा, औरंगजेब जैसे प्रबल शत्रु और उसकी बलशाली सेना के साथ आठ वर्षों तक किस तरह जूझते रहे, यह उनके ध्यान में नहीं आया। विशेष रूप से सम्भाजी के दक्षिण कर्नाटक पर किये गये दो आक्रमण, बुरहानपुर पर उनका दबाव, कुशल अंग्रेजों पर उनके प्रभाव, अरबों के साथ मैत्री, बसई से लेकर पणजी तक पश्चिमी तट के प्रत्येक बन्दरगाह पर पुर्तगालियों के साथ संघर्ष, का कोई विवरण मल्हारराव के पास नहीं है। उन्हें बस एक सत्य मालूम है कि सम्भाजी ने अपने वरिष्ठ कर्मचारियों और सगे सम्बन्धियों को कैद किया था। विशेष रूप से 1685 के पश्चात् महाराष्ट्र के भयानक अकाल और उसके दुखद परिणाम, उसी प्रकार गोलकुंडा और बीजापुर के शासकों को मिलाकर औरंगजेब के आक्रमण के विरुद्ध सम्भाजी द्वारा छेड़ा गया अभियान और महासंग्राम की तैयारी की ओर इस इतिहास में कोई ध्यान नहीं दिया गया।
  3. मराठों का विश्वसनीय इतिहास लिखने में रियासतकार सरदेसाई ने अद्वितीय कार्य किया। ग्रांट डफ के बाद उन्होंने ही मराठों के क्रमवार इतिहास लेखन का कार्य सम्पन्न किया। इतिहास के कोनों में अलक्षित तथ्यों को उन्होंने स्पष्ट रूप से आलोकित किया। 1832 में 'हितचिन्तक' मासिक पत्रिका में आपने 776 . सम्भाजी