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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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'भाऊसाहब पेशवा के जीवनवृत्त की रेखाएँ' शीर्षक से एक आलेख लिखा था। 'पानीपत' उपन्यास लिखते समय भाऊसाहब के अभिनव चरित्र चित्रण में मैंने उस लेख का सुन्दर उपयोग किया था। किन्तु रियासती में सम्भाजी के समय का इतिहास लिखते समय सरदेसाई के भीतर का अनुशासित, सजग और नीर-क्षीर विवेकी इतिहासकार दिखाई नहीं पड़ता। मल्हारराव द्वारा किये गये मिथ्या और द्वेषपूर्ण चित्रण से सम्भाजी के चरित्र पर धूल की इतनी मोटी पर्त जम गयी है कि उसे हटा पाना परिश्रम का कार्य है। इसलिए सरदेसाई ने भी लगभग मल्हारराव की कार्बन कापी ही तैयार की। 'रियासत' में अनेक असत्य और विकृत विधान भरे पड़े हैं। शिवाजी महाराज ने कभी भी पन्हालगढ़ पर सम्भाजी को कैद अथवा नजरबन्द नहीं किया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों से यह प्रमाणित है। दिलेरखान के पास जाते समय उनकी पत्नी दुर्गादेवी साथ थीं न कि येसूबाई, परन्तु रियासतकार येसूबाई को वहाँ भेज देते हैं और बड़ी नाटकीयता से उन्हें पुरुषवेष में तैयार करके उन्हें मुक्त भी करा देते हैं। अपनी रियासत के पहले खंड 'शककर्ता शिवाजी' के पृष्ठ क्रमांक 344 पर (सद्यःप्रकाशित पापुलर प्रकाशन का संस्करण देखें) रियासतकार लिखते हैं कि 'सोयराबाई सम्भाजी द्वारा मारी गयीं।' इसके विपरीत इस बात के असंख्य प्रमाण तब भी थे और आज भी हैं कि सम्भाजी के सिंहासनारोहण के वर्ष डेढ़ वर्ष बाद तक सोयराबाई जीवित रहीं। 4 सम्भाजी के सम्बन्ध में अत्यधिक मात्रा में पुर्तगाली दस्तावेज मूल रूप में उपलब्ध हैं। कवि कलश और उनके बीच हुए पत्राचार और अँग्रेजों के साथ हुई सन्धि के मूल दस्तावेज उपलब्ध हैं। आज भी वाराणसी की काशी नागरी प्रचारिणी सभा में सम्भाजी के संस्कृत काव्य महाकाव्य, ब्रजभाषा काव्य सम्बन्धी जानकारी सुरक्षित है। दुर्दैव से किसी अध्येता ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसके विपरीत अध्येताओं में इस बात की होड़ लगी रही कि वे किस प्रकार सिद्ध कर सकें कि शिवाजी महाराज जैसे युगपुरुष का बेटा कितना मद्यपी, विषयासक्त, उद्धत और अशिष्ट था। औरंगजेब ने ऐसी प्रतिज्ञा की थी कि काफिर का बच्चा सम्भा जब तक हाथ नहीं लगता, तब तक मैं मुकुट नहीं पहनूँगा। इसके अनुसार अपने नंगे सिर, हिन्दुस्तान का शहंशाह सम्भाजी की खोज में जंगल-जंगल भटकता रहा। इस बात के ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध होने पर भी हमारे नाटककारों को उसमें कोई नाट्यतत्त्व दिखाई नहीं पड़ा। इसके विपरीत विषयी, क्रोधी और दुष्ट राजकुमार उन्हें सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण ड्रामेटिक डिवाइस दिखाई पड़ी। इतिहासकारों ने भी उसी सम्भाजी 777