छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)
Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography
कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा
पृष्ठ 782, कुल 793 में से
संदर्भ में पढ़ेंब्राह्मण, सम्भाजी का साथ मृत्यु की सीढ़ियों तक निभाता रहा। विशेष रूप से 1685 के बाद जब महाराष्ट्र के अनेक मराठा और ब्राह्मण जागीरदार जागीर प्राप्त करने के लिए औरंगजेब के कदम चूम रहे थे, ऐसे समय में कवि कलश ने पत्र लिखा था, "राजद्रोह नहीं करूँगा। सम्भाजी महाराज का साथ नहीं छोड़ूँगा।" ऐसे अनेक मूल पत्र उस समय के कागज पत्रों में उपलब्ध हैं। पेशवा कार्यालय में कवि कलश का ऐसा पत्र भी सुरक्षित है जिसमें उन्होंने लिखा था कि अत्याचार के कारण धर्मान्तर करने वाले हरसूल के कुलकर्णी को पुनः हिन्दू धर्म में सम्मिलित किया जाए, उनका शुद्धीकरण किया जाए। इन कागज पत्रों और प्रमाणों पर यदि गम्भीरता से विचार किया जाये तो नाटककारों और इतिहासकारों के आक्षेप अपने आप निर्मूल हो जाते हैं। 10. 'बुसातीन उस्-सलातिन' नामक ग्रन्थ में उल्लेख है कि सम्भाजी का एक ब्राह्मण कन्या के साथ प्रेम था। वे उससे मिलने के लिए रात को किले से बाहर जाते थे। यह कन्या थी अण्णाजी दत्तो की बेटी, ऐसा भी कुछ लोग मानते हैं। 'द मिलिट्री सिस्टम ऑफ मराठाज़' जैसा शोधपरक और उच्चकोटि का ग्रन्थ लिखते हुए डॉ सेन ने कुछ बहुत महत्त्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया है। उनके अनुसार उस समय प्रत्येक किले के किलेदार सन्ध्या समय किले के दरवाजों को अपने से भीतर से ताला लगाते थे। दूसरे दिन वह स्वयं चाबी लेकर जाते थे और उनके सामने दरवाजा खोला जाता था। स्वयं शिवाजी महाराज के किले पर रहते हुए ऐसी परिस्थिति में आधी रात सम्भाजी का घूमना सर्वथा असम्भव कल्पना है। गोदावरी की एक लोककथा है। श्री द. ग. गोडसे ने उसे बड़े प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। किसी सुन्दर और शौर्यवान पुरुष से अनेक स्त्रियाँ एकतरफा प्रेम कर सकती हैं। परन्तु इसका अर्थ उस पुरुष का स्त्रीलम्पट अथवा चरित्रहीन होना नहीं होता। 11. जिस समय सम्भाजी संगमेश्वर में पकड़े गये उस समय असावधान थे क्या? अथवा उस समय विनोद विलास में डूबे होने के कारण पकड़े गये? इतिहासकारों ने इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया है कि इस प्रवास के समय राजा के साथ कौन-कौन थे। रायगढ़ का स्थानीय कार्यभार सँभालने वाली महारानी येसूबाई, हिन्दवी स्वराज्य के सेनापति म्हालोजी घौड़पड़े, रामदास स्वामी के पट्ट शिष्य रंगनाथ स्वामी, धनाजी, सन्ताजी जैसे कुशल और आत्मीय जनों के बीच सम्भाजी भोग विलास में कैसे रम सकते थे? इतिहास साक्षी है कि संगमेश्वर पहुँचने के पहले सम्भाजी ने पास के विशालगढ़ के किले के गिरे हुए बुर्ज को दो तीन दिन में ठीक करवाया था। यदि दूसरा समय होता तो इस कार्य में महीनों लग जाते। उसी समय सुदूर दक्षिण के तमिल प्रान्त में केशव त्रिमल के नेतृत्व में अठारह हजार की सेना लड़ रही थी। आंबा घाट पर सात-आठ हजार की मलकापुरी फौज 780 :: सम्भाजी