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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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पालन किया था, उससे महाराष्ट्र के बहुत से जागीरदार और जमींदार दुखी हो गये थे। उन्होंने सम्भाजी की मृत्यु के पश्चात ही बड़े पैमाने पर सम्भाजी की बदनामी करनी आरम्भ की। 7. शिवाजी महाराज के अष्टप्रधानों में और प्रमुख कर्मचारियों में दुर्भाग्य से अनेक आगे चलकर विश्वसनीय नहीं रहे। बालाजी आवजी और मोरोपन्त जैसे वरिष्ठ एवं सम्मानित व्यक्ति इसमें सम्मीलित थे। राजनीति में कुशल अण्णाजी दत्तो और उनके द्वारा स्थान-स्थान पर नियुक्त स्वार्थी कर्मचारियो द्वारा भ्रष्टाचार और अविश्वसनीयता का वातावरण बढ़ रहा था। वय से तरुण और हृदय मे पवित्र सम्भाजी ने उनके विरोध में आवाज उठाई। इससे प्रभावित अधिकारियों ने शिवाजी महाराज से शिकायत की। इसलिए ऐन मौके पर शिवाजी महाराज ने कर्नाटक युद्ध में उन्हें साथ ले जाने से मना कर दिया। यहीं से सम्भाजी और अधिकारियों के बीच संघर्ष आरम्भ हुआ। पीढ़ियों के बीच का अन्तर भी इसमें कारणीभूत था। शिवाजी के पुत्र और दूसरे छत्रपति बने सम्भाजी के भोजन में विष मिलाकर उन्हें मारने का प्रयास इन अधिकारियों ने अनेक बार किया। इस राजद्रोह और विश्वासघात को बार-बार क्षमा करने पर भी इसकी पुनरावृत्ति होती रही। उन लोगों ने अपने राजा को समाप्त कर देने का प्रयास बार बार किया। इसीलिए अन्त मे इन कर्मचारियों को राजदंड देने के कर्तव्य का निर्वाह सम्भाजी को करना पडा। इन्हीं कर्मचारियों के वंशजों ने बाद में सम्भाजी के चरित्र का हनन किया। पानीपत के युद्ध के समय भाऊसाहब का साथ छोड़कर जो लोग महाराष्ट्र भाग आये थे उन्होंने अपने सम्मान की रक्षा के लिए पानीपत का जो झूठा इतिहास रचा उसमें और जानबूझकर सम्भाजी की की गयी बदनामी में एक ही मनोवृत्ति काम कर रही थी। 8 औरंगजेब के महाआक्रमण का मुँह मोड़ने के लिए सम्भाजी ने हर सम्भव प्रयत्न किया था। कुतुबशाह और आदिलशाह ही नहीं, इक्केरी के बासप्पा नाईक तक दक्षिण के अनेक राजाओं का एक संघ सम्भाजी ने तैयार किया था। परन्तु कुतुबशाह विलासी वृत्ति का और आदिलशाह उम्र में कम और अनुभव में शून्य था। फिर भी दक्षिण की रक्षा करने में सम्भाजी राजा, हंबीरराव मोहिते, निलोपन्त पेशवा, खंडो बल्लाल केसो त्रिमल पिंगले आदि की भूमिका उल्लेखनीय है। औरंगजेब के सेना समुद्र से यदि सम्भाजी आठ वर्षों तक लगातार न लड़ते, दो-चार महीने में ही हथियार डाल दिया होता तो आज का महाराष्ट्र कहाँ होता ? 9 कवि कलश के सम्बन्ध में नाटककारों ने एक कपटी, पाखंडी और धूर्त व्यक्ति का चित्र प्रस्तुत किया है किन्तु कविराज की उपलब्ध काव्य-पंक्तियाँ उन्हें एक ईमानदार और राजनिष्ठ व्यक्ति प्रमाणित करती हैं। एक ओर जहाँ शिवाजी महाराज के सभी जामाता औरंगजेब के साथ जाकर मिल गये थे वहीं यह कनौजी सम्भाजी :: 779