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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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गहराई से शोध करने वाले डॉ. जयसिंह राव पवार और डॉ. सदाशिव शिवदे ख्यात शोधकर्ता हैं। इन दोनों के साथ समय-समय पर होने वाले विचार-विमर्श और उनके द्वारा दिए गये सुझावों का मुझे बहुत लाभ हुआ है। इसके अतिरिक्त पुणे के डेकन कॉलेज की ग्रन्थपाल सौभाग्यवती मोरे, लोकमान्य तिलक ग्रन्थालय, चिपलूण के कार्यवाह, मेरे मित्र प्रकाश देशपाण्डे, सुधागढ़ पाली के श्री सूर्यकान्त ताटे और सुरेश पोतदार का सहयोग भी मेरे लिए मूल्यवान है। पत्रकार श्री मधुकर भावे, और उल्लासदादा पवार ने मुझे इस संकल्प सिद्धि की प्रेरणा निरन्तर दी है। बहादुरगढ़ (तहसील श्रीगोंदा) की यात्रा के समय मेरे मित्र प्रकाश और श्री अरुण जाखड़े ने बहुत समय दिया। शृंगारपुर और संगमेश्वर देखते समय श्री मुरलीधर बोरसूदकर, सत्यवान बिचारे, श्रीकान्त बेड़ेकर, शृंगारपुर के दीपक म्हस्के व विनायक म्हस्के तथा मेरे अधिकारी मित्र दिनकर पाटील व. वसन्त पाटील ने उत्साह से सहयोग किया। भयंकर मालेघाट देखते समय सत्यवान बिचारे सर्पदंश के शिकार हो गये थे। साधन सामग्री की आपूर्ति करने वाले पूर्व केन्द्रीय मन्त्री रमाकान्त खलप और नासिक के लोकेश शेवड़े का भी मैं हृदय से आभारी हूँ। श्री उद्धव ठाकरे ने स्वयं हेलिकाप्टर से जंजीरा और रायगढ़ किले के स्वयं लिए गये दो छायाचित्र उपलब्ध कराए। मैं उनका आभारी हूँ। इस ग्रन्थ के महत्त्व की वृद्धि करने वाले अनेक छायाचित्र खींचने वाले, स्थान-स्थान पर मेरे साथ भटकने वाले छायाचित्रकार प्रवीण देशपाण्डे का मैं आभार मानता हूँ। इस उपन्यास के लेखन में मेरे मित्र उपन्यासकार श्री अनन्त सामन्त श्री सम्भाजी जाधव, मेरी पत्नी सौभाग्यवती चन्द्रसेना पाटील, बन्धु सुरेश पाटील, कविवर्य केलुसकर के साथ हुई चर्चाओं का बड़ा उपयोग हुआ है। मेरे मित्र गजलकार श्री दिलीप पांढरपट्टे के साथ विचार-विमर्श से उर्दू भाषा के उपयोग में महत्त्वपूर्ण सहायता मिली। इस उपन्यास की पांडुलिपि तैयार करने में श्री पंडित आलुगड़े की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। मैं उनकी लगनशीलता और कार्यकुशलता के लिए उन्हें शाबासी देता हूँ। श्री शंकर सारडा, डॉ. म.द. हातकडंगलेकर, निर्मल भट्टाचार्य, वामन भोवाल, सुहास सोनावणे, कल्याण तावरे, डॉ. सुवर्णा निंबालकर विलास राठौड़, डॉ. हिकमत उदान, प्रा अशोक गोडबोले, श्री रमेश कीर आदि ने मुझ पर और मेरे साहित्य पर सदैव ही स्नेह की वर्षा की है। उनके ऋण से उऋण होना सम्भव नहीं। चित्रकार श्री चन्द्रमोहन कुलकर्णी ने चित्रांकन की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाई। उसी तरह इस वृहद उपन्यास को समय पर और सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रकाशित करने के लिए श्री अनिल और सुनील मेहता-पिता-पुत्रों का आभारी हूँ। प्रकाशन के सन्दर्भ में 'मेहता पब्लिशिंग हाउस' की श्रीमती चारुलता पाटील और सम्भाजी :: 783