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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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अश्विनी खेर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन मैं अपना कर्तव्य मानता हूँ। मुझे विश्वास है कि आज तक जिस आत्मीयता से मेरे उपन्यासों का मराठी भाषा में आदर होता रहा है उसी प्रकार 'सम्भाजी' का भी होगा। उसी प्रकार अन्य भारतीय भाषाओं में असंख्य पाठकों की ममता मुझे मिलेगी। प्रस्तुत उपन्यास में दिनांक, सन् और अन्य विवरण अँग्रेजी पद्धति से केवल पाठकों की सुविधा के लिए दिए गये हैं। पाठक कृपया इस बात को ध्यान में रखें। 17. सम्भाजी महाराज के व्यक्तित्व और चरित्र पर अभिनव प्रकाश डालने का महत्त्वपूर्ण कार्य सबसे पहले वा.सी. बेन्द्रे ने किया। उसके पश्चात् सेतु माधवराव पगड़ी, कमल गोखले, विजय देशमुख से लेकर डॉ. जयसिंहराव पवार और डॉ. सदाशिव शिवदे तक लोगों ने निरन्तर यह कार्य किया है। स्वातंत्र्यवीर सावरकर जैसे क्रान्तिपुरुष ने भी सम्भाजीराजा के गौरवपूर्ण कार्यों का उल्लेख अनेक बार बड़े आदर से किया है। दिनांक 26 फरवरी, 1908 को सन्ध्या समय सोलापुर में दासनवमी के उत्सव के अवसर पर लोकमान्य तिलक ने एक भाषण दिया था। उस भाषण में शिवपुत्र सम्भाजी का गुणगान करते हुए उन्होंने एक स्वरचित संस्कृत श्लोक कहा था। उसी श्लोक से मैं अपने इस निवेदन की पूर्णाहुति करता हूँ- "स्वधर्मे निधनं श्रेयो गीतावचनं उज्ज्वलम् शिवसुतोश्च हौतात्म्यं धर्मराष्ट्रकृत्ये खलु ते।।" -विश्वास पाटील 784 :: सम्भाजी