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छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

छत्रपति संभाजी महाराज (धर्मवीर स्वराज्य-रक्षक एवं मुग़ल-प्रतिरोध सम्पूर्ण इतिहास)

Chhatrapati Sambhaji Maharaj Comprehensive Historical Biography

कमल गोखले / ऐतिहासिक शोध मण्डल द्वारा

DevanagariHindipublished793 पृष्ठ

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महत्त्वाकांक्षा की भूख मे बेचैन होती हैं। यह खेल बहुत पुराने जमाने से चला आ रहा है। आगे पीछे कोई समस्या न उत्पन्न हो इसलिए रायगढ दूत भेजकर सूचना दे देनी चाहिए, ऐसा मेरा विचार है। " छह आसमान मे उड़ने वाले सफेद बादलों की तरह दिन तेजी से गुजर रहे थे। श्रृंगारपुर की दिनचर्या मे कोई विशेष अन्तर नही आया था। इसी बीच एक दिन दोपहर के समय बालाजी आवजी चिटणीस की पालकी महल के दरवाजे पर आ पहुँची। पतले शरीर, गहरे गोरे रंग, मजबूत काठी वाले साठ वर्षीय बालाजी पालकी से उतरे। बीस वर्षीय तरुण की भाँति तेजी से महल की पचीस सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर आये। बालाजी बीच के चौक पर आये तो येसूबाई ने सामने आकर उनका स्वागत किया। शम्भूराजा भी बालाजी के अचानक आगमन से चौंक गये। दोनो एक-दूसरे की बाँहों में समा गये। शम्भूराजा ने हँसते हुए पूछा, "बालाजी काका एकदम बिना सूचना के कैसे आ गये?" "शम्भूराजा! गढ़ पर अब मन नहीं लगता। महाराज का कर्नाटक गये कई महीने हो गये। सोचा कम से कम युवराज के ही साहचर्य मे दो दिन बिता लें।" स्वराज्य की स्थापना करते समय शिवाजी महाराज ने अपने आसपास बहुत से नर रत्नों का समूह एकत्र कर रखा था। उनमें से तानाजी बाजीप्रभु देशपांडे शिवा काशीद जैसे अनेक रत्न शहीद हो चुके थे। कुछ वृद्धावस्था के कारण समाप्त हो गये थे। इस समय राजदरबार में हबीरराव, येसाजी कंक हिरोजी फर्जन्द, अण्णाजी दत्तो, मोरोपन्त पिंगले, राहुजी सोमनाथ जैसे उँगलियों पर गिने जा सकने वाले लोग ही पुराने समय के बचे थे। उन्हीं मे बालाजी आवजी चिटणीस का समावेश था। चिटणीस खानदान का स्वराज्य की सेवा में प्रवेश एक दुर्घटना और योगायोग का परिणाम था। बालाजी के कर्मठ पिता आवजी हरि चित्रे जंजीरा के सिद्दी के यहाँ दीवान थे। मराठी प्रदेश पर भयानक अत्याचार करने के लिए सिद्दी कुख्यात था। किन्तु अपनी कार्यकुशलता और निष्ठा के कारण आवजी हरि सिद्दी के दीवान बने रहे। आवजी की दिनोंदिन बढ़ती समृद्धि और प्रगति से अनेक मुसलमान कर्मचारी ४० सम्भाजी