भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-जरणा का अंग 5 दादू जरै सु परम प्रकाश है, जरै सु परम उजास । जरै सु परम उदीत है, जरै सु परम विलास ॥ 29 ॥ दादू जरै सु परम पगार है, जरै सु परम विगास । जरै सु परम प्रभास है, जरै सु परम निवास ॥ 30 ॥ परमेश्वर की दयालुता दादू एक बोल भूले हरि, सो कोई न जाणै प्राण । औगुण मन आणै नहिं, और सब जाणै हरि जाण ॥ 31 ॥ सतगुरु अगम बात जानने के लिए विनय करते हैं दादू तुम जीवों के औगुण तजे, सु कारण कौन अगाध ? मेरी जरणा देख कर, मति को सीखें साध ॥ 32 ॥ धारणा पवना पानी सब पिया, धरती अरु आकास । चन्द सूर पावक मिले, पंचों एक ग्रास ॥ 33 ॥ चौदह तीनों लोक सब, ढूंगे श्वासै श्वास । दादू साधू सब जरैं, सतगुरु के विश्वास ॥ 34 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य पांचवां जरणा का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 5 ॥ साखी 34 ॥

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