भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-निष्कर्म पतिव्रता का अंग 8 स्मरण नाम निःसंशय सांई सन्मुख जीवतां, मरतां सन्मुख होइ । दादू जीवन मरण का, सोच करै जनि कोइ ॥ 17 ॥ पतिव्रत साहिब मिल्या तो सब मिले, भेंटे भँटा होइ । साहिब रह्या तो सब रहे, नहीं तो नाहीं कोइ ॥ 18 ॥ दादू रीझै राम पर, अनत न रीझै मन। मीठा भावै एक रस, दादू सोई जन ॥ 19 ॥ दादू मेरे हृदय हरि बसै, दूजा नांही और। कहो कहाँ धौं राखिये, नहीं आन को ठौर ॥ 20 ॥ दादू नारायण नैना बसै, मनही मोहन राइ। हिरदा मांही हरि बसै, आतम एक समाइ ॥ 21 ॥ दादू तन मन मेरा पीव सौं, एक सेज सुख सोइ। गहिला लोग न जाणही, पच पच आपा खोइ ॥ 22 ॥ दादू एक हमारे उर बसै, दूजा मेल्या दूर। दूजा देखत जाइगा, एक रह्या भरपूर ॥ 23 ॥ निश्चल का निश्चल रहै, चंचल का चल जाइ। दादू चंचल छाड़ि सब, निश्चल सौं ल्यौ लाइ ॥ 24 ॥ साहिब रहतां सब रह्या, साहिब जातां जाइ। दादू साहिब राखिये, दूजा सहज स्वभाइ ॥ 25 ॥ मन चित मनसा पलक मैं, सांई दूर न होइ। निष्कामी निरखै सदा, दादू जीवन सोइ ॥ 26 ॥ कथनी बिना करणी जहाँ नाम तहँ नीति चाहिये, सदा राम का राज। निर्विकार तन मन भया, दादू सीझै काज ॥ 27 ॥

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