सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-निष्कर्म पतिव्रता का अंग 8 जिसका तिसकौं दीजिये, सांई सन्मुख आइ। दादू नख शिख सौंप सब, जनि यहु बंट्या जाइ ॥ 39 ॥ सारा दिल सांई सौं राखै, दादू सोई सयान। जे दिल बंटै आपना, सो सब मूढ़ अयान ॥ 40 ॥ दादू सारों सौं दिल तोरि कर, सांई सौं जोड़ै। सांई सेती जोड़ करि, काहे को तोड़ै ॥ 41 ॥ साहिब देवै राखणा, सेवक दिल चोरै। दादू सब धन साह का, भूला मन थोरै ॥ 42 ॥ पतिव्रत दादू मनसा वाचा कर्मना, अंतर आवै एक। ताको प्रत्यक्ष राम जी, बातें और अनेक ॥ 43 ॥ दादू मनसा वाचा कर्मना, हिरदै हरि का भाव। अलख पुरुष आगे खड़ा, ताके त्रिभुवन राव ॥ 44 ॥ दादू मनसा वाचा कर्मना, हरि जी सौं हित होइ। साहिब सन्मुख संग है, आदि निरंजन सोइ ॥ 45 ॥ दादू मनसा वाचा कर्मणा, आतुर कारण राम। सम्रथ सांई सब करै, परगट पूरे काम ॥ 46 ॥ नारी पुरुषा देख करि, पुरुषा नारी होइ। दादू सेवक राम का, शीलवन्त है सोइ ॥ 47 ॥ आन लग्न व्यभिचार पर पुरुषा रत बांझणी, जाणे जे फल होइ। जन्म बिगोवै आपना, दादू निष्फल सोइ ॥ 48 ॥ दादू तज भरतार को, पर पुरुषा रत होइ। ऐसी सेवा सब करैं, राम न जाने सोइ ॥ 49 ॥
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