सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-माया का अंग 12 दादू बाँधे वेद विधि, भरम करम उरझाइ । मर्यादा माँही रहै, सुमिरण किया न जाइ ॥ 158 ॥ माया नगरी दोष निरूपण दादू माया मीठी बोलणी, नइ नइ लागै पाइ । दादू पैसि पेट में, काढ कलेजा खाइ ॥ 159 ॥ नारी नागिन जे डसे, ते नर मुये निदान । दादू को जीवै नहीं, पूछो सबै सयान ॥ 160 ॥ नारी नागिन एक सी, बाघिन बड़ी बलाइ । दादू जे नर रत भये, तिनका सर्वस खाइ ॥ 161 ॥ नारी नैन न देखिये, मुख सौं नाम न लेइ । कानों कामिनि जनि सुणै, यहु मन जाण न देइ ॥ 162 ॥ सुन्दरी खाये साँपिनी, केते इहि कलि माँहि । आदि अन्त इन सब डसे, दादू चेते नांहि ॥ 163 ॥ दादू पैसै पेट में, नारी नागिन होइ । दादू प्राणी सब डसे, काढ सकै न कोइ ॥ 164 ॥ माया सांपिनी सब डसे, कनक कामिनी होइ । ब्रह्मा विष्णु महेश लौं, दादू बचै न कोइ ॥ 165 ॥ माया मारै जीव सब, खंड खंड कर खाइ । दादू घट का नास कर, रोवै जग पतियाइ ॥ 166 ॥ बाबा बाबा कहि गिलै, भाई कहि कहि खाइ । पूत पूत कहि पी गई, पुरुषा जनि पतियाइ ॥ 167 ॥ ब्रह्मा विष्णु महेश की, नारी माता होइ । दादू खाये जीव सब, जनि रु पतीजै कोइ ॥ 168 ॥ माया बहुरूपी नटणी नाचै, सुर नर मुनि को मोहै । ब्रह्मा विष्णु महादेव बाहे, दादू बपुरा को है ॥ 169 ॥
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