सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-माया का अंग 12 माया फाँसी हाथ ले, बैठी गोप छिपाहि । जे कोई धीजे प्राणियां, ताही के गल बाहि ॥ 170 ॥ पुरुषा फाँसी हाथ कर, कामिनि के गल बाहि । कामिनि कटारी कर गहै, मार पुरुष को खाहि ॥ 171 ॥ नारी बैरिन पुरुष की, पुरुषा बैरी नार। अंत काल दोन्यूं मुये, दादू देख विचार ॥ 172 ॥ नारी पुरुष को ले मुई, पुरुषा नारी साथ। दादू दोनों पच मुये, कछू न आया हाथ ॥ 173 ॥ नारी पीवै पुरुष को, पुरुष नारी को खाइ । दादू गुरु के ज्ञान बिन, दोनों गये विलाइ ॥ 174 ॥ भँवरा लुब्धी बास का, कमल बँधाना आइ । दिन दश माँहैं देखतां, दोनों गये विलाइ ॥ 175 ॥ इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम तत्वसारमत-सर्वसाधुबुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य बारहवां माया कअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 12 ॥ साखी 175 ॥
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