सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13 दादू कोई काहू जीव की, करै आत्माघात । साच कहूँ संशय नहीं, सो प्राणी दोज़ख जात ॥ 4 ॥ दादू नाहर सिंह सियाल सब, केते मुसलमान । माँस खाइ मोमिन भये, बड़े मियां का ज्ञान ॥ 5 ॥ दादू माँस अहारी जे नरा, ते नर सिंह सियाल । बक1 मंजार2 सुनहाँ3 सही, एता प्रत्यक्ष काल ॥ 6 ॥ दादू मुई मार मानुष घणे, ते प्रत्यक्ष जम काल । महर दया नहीं सिंह दिल, कूकर काग सियाल ॥ 7 ॥ माँस अहारी मद पीवै, विषय विकारी सोइ । दादू आत्मराम बिन, दया कहाँ थी होइ ॥ 8 ॥ लंगर लोग लोभ सौं लागैं, बोलैं सदा उन्हों की भीर । जोर जुल्म बीच बटपारे, आदि अंत उन्हीं सौं सीर ॥ 9 ॥ तन मन मार रहे सांई सौं, तिनकौं देख करैं ताजीर । ये बड़ि-बूझ कहाँ थैं पाई, ऐसी कजा अवलिया पीर ॥ 10 ॥ बे महर गुमराह गाफिल, गोश्त खुरदनी । बेदिल बदकार आलम, हयात मुरदनी ॥ 11 ॥ छल कर बल कर घाइ कर, मारै जिंहि तिंहि फेरि । दादू ताहि न धीजिये, परणै सगी पतेरि ॥ 12 ॥ दादू दुनियां सौं दिल बांध करि, बैठे दीन गँवाइ । नेकी नाम बिसार करि, करद कमाया खाइ ॥ 13 ॥ दादू गल काटैं कलमा भरैं, अया विचारा दीन । पंचों वक्त नमाज गुजारैं, साबित नहीं यकीन ॥ 14 ॥ दुनियां के पीछे पड़ा, दौड़ा दौड़ा जाइ । दादू जिन पैदा किया, ता साहिब को छिटकाइ ॥ 15 ॥
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