सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13 दादू नफ्स नाम सौं मारिये, गोशमाल दे पंद। दूई है सो दूरि कर, तब घर में आनन्द ॥ 27 ॥ सच्चे मुसलमान के लक्षण मुसलमान जो राखे मान, सांई का माने फरमान। सारों को सुखदाई होइ, मुसलमान कर जानूँ सोइ ॥ 28 ॥ दादू मुसलमान महर गह रहै, सबको सुख, किसही नहिं दहै। मुवा न खाइ, जीवत नहिं मारै, करै बंदगी, राह संवारै ॥ 29 ॥ सो मोमिन मन मे कर जान, सत्य सबूरी बैसे आन। चलै साच सँवारे बाट, तिनको खुले बहिश्त के पाट ॥ 30 ॥ सो मोमिन मोम दिल होइ, सांई को पहचानै सोइ। जोर न करै हराम न खाइ, सो मोमिन बहिश्त में जाइ ॥ 31 ॥ जो हम नहीं गुजारते, तुम्ह को क्या भाई। सीर नहीं कुछ बंदगी, कहु क्यों फरमाई ॥ 32 ॥ अपने अमलों छूटिये, काहू के नाहीं। सोई पीड़ पुकार सी, जा दूखै माहीं ॥ 33 ॥ कोई खाइ अघाइ करि, भूखे क्यों भरिये। खूटी पूगी आन की, आपण क्यों मरिये ॥ 34 ॥ फूटी नाव समंद में, सब डूबन लागे। अपना अपना जीव ले, सब कोई भागे ॥ 35 ॥ दादू शिर शिर लागी आपने, कहु कौण बुझावै। अपना अपना साच दे, सांई को भावै ॥ 36 ॥ सुमिरण नाम चितावनी साचा नाम अल्लाह का, सोई सत्य कर जाण। निश्चल कर ले बंदगी, दादू सो परमाण ॥ 37 ॥
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