सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13 आवट कूटा होत है, अवसर बीता जाइ । दादू कर ले बंदगी, राखणहार खुदाइ ॥ 38 ॥ इस कलि केते ह्वै गये, हिंदू मुसलमान । दादू सांची बंदगी, झूठा सब अभिमान ॥ 39 ॥ कथनी बिना करणी पोथी अपना पिंड कर, हरि यश माँहीं लेख । पंडित अपना प्राण कर, दादू कथहु अलेख ॥ 40 ॥ काया कतेब बोलिए, लिख राखूं रहमान । मनवा मुल्लां बोलिये, श्रोता है सुबहान ॥ 41 ॥ दादू काया महल में नमाज गुजारूं, तहँ और न आवन पावै । मन मणके कर तसबीह फेरूं, तब साहिब के मन भावै ॥ 42 ॥ दिल दरिया में गुसल हमारा, ऊजू कर चित लाऊँ । साहिब आगेकरूं बंदगी, बेर बेर बलि जाऊँ ॥ 43 ॥ दादू पंचों संग संभालूं सांई, तन मन तब सुख पाऊँ। प्रेम पियाला पिवजी देवै, कलमा ये लै लाऊँ ॥ 44 ॥ शोभा कारण सब करै, रोजा बांग नमाज । मुवा न एकौ आह सौं, जे तुझ साहिब सेती काज ॥ 45 ॥ हर रोज हजूरी होइ रहु, काहे करै कलाप । मुल्ला तहाँ पुकारिये, जहाँ अर्श इलाही आप ॥ 46 ॥ हरदम हाजिर होना बाबा, जब लग जीवै बंदा । दायम दिल सांई सौं साबित, पंच वक्त क्या धंधा ॥ 47 ॥ हिंदू मुसलमानों का भ्रम दादू हिंदू मारग कहैं हमारा, तुरक कहैं रह मेरी । कहाँ पंथ है कहो अलह का? तुम तो ऐसी हेरी ॥ 48 ॥ दादू दुई दरोग लोग को भावै, सांई को साँच पियारा । कौन पंथ हम चलैं कहो धू, साधो करो विचारा ॥ 49 ॥
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