भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-सांच का अंग 13 खंड खंड कर ब्रह्म को, पख पख लीया बाँट। दादू पूरण ब्रह्म तज, बँधे भरम की गाँठ ॥ 50 ॥ मन विकार औषधि जीवत दीसै रोगिया, कहैं मूवां पीछे जाइ। दादू दुँह के पाठ में, ऐसी दारू लाइ ॥ 51 ॥ सो दारू किस काम की, जाथैं दर्द न जाइ। दादू काटै रोग को, सो दारू ले लाइ ॥ 52 ॥ दादू अनुभव काटै रोग को, अनहद उपजै आइ। सेझे का जल निर्मला, पीवै रुचि ल्यौ लाइ ॥ 53 ॥ सोई अनुभव सोई ऊपजी, सोई शब्द तत सार। सुनतां ही साहिब मिलै, मन के जाहिं विकार ॥ 54 ॥ चानक उपदेश औषध खाइ न पथ्य रहै, विषम व्याधि क्यों जाइ। दादू रोगी बावरा, दोष बैद को लाइ ॥ 55 ॥ एक सेर का ठांवड़ा, क्योंही भऱ्या न जाइ। भूख न भागी जीव की, दादू केता खाइ ॥ 56 ॥ पशुवां की नांई भर भर खाइ, व्याधि घणेरी बधती जाइ। पशुवां नांई करै अहार, दादू बाढै रोग अपार ॥ 57 ॥ राम रसायन भर भर पीवै, दादू जोगी जुग जुग जीवै। संयम सदा, न व्यापै व्याधी, रहै निरोगी लगै समाधी ॥ 58 ॥ शिश्न श्वास दादू चारै चित दिया, चिन्तामणि को भूल। जन्म अमोलक जात है, बैठे माँझी फूल ॥ 59 ॥ भरी अधौड़ी भावठी, बैठा पेट फुलाइ। दादू शूकर स्वान ज्यों, ज्यों आवै त्यों खाइ ॥ 60 ॥

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