सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सारग्राही का अंग 17 आपै आप प्रकाशिया, निर्मल ज्ञान अनन्त । क्षीर नीर न्यारा किया, दादू भज भगवंत ॥ 5 ॥ क्षीर नीर का संत जन, न्याव नबेरैं आइ । दादू साधु हंस बिन, भेल सभेले जाइ ॥ 6 ॥ दादू मन हंसा मोती चुणै, कंकर दिया डार । सतगुरु कह समझाइया, पाया भेद विचार ॥ 7 ॥ दादू हंस मोती चुणै, मानसरोवर जाइ । बगुला छीलर बापुड़ा, चुण चुण मछली खाइ ॥ 8 ॥ दादू हंस मोती चुगैं, मानसरोवर न्हाइ । फिर फिर बैसैं बापुड़ा, काग करंकां आइ ॥ 9 ॥ दादू हंस परखिये, उत्तम करणी चाल । बगुला बैसे ध्यान धर, प्रत्यक्ष कहिये काल ॥ 10 ॥ उज्ज्वल करणी हंस है, मैली करणी काग । मध्यम करणी छाड़ि सब, दादू उत्तम भाग ॥ 11 ॥ दादू निर्मल करणी साधु की, मैली सब संसार । मैली मध्यम ह्वै गये, निर्मल सिरजनहार ॥ 12 ॥ दादू करणी ऊपर जाति है, दूजा सोच निवार । मैली मध्यम ह्वै गये, उज्ज्वल ऊँच विचार ॥ 13 ॥ उज्ज्वल करणी राम है, दादू दूजा धंध । का कहिये समझै नहीं, चारों लोचन अंध ॥ 14 ॥ दादू गऊ बच्छ का ज्ञान गहि, दूध रहै ल्यौ लाइ । सींग पूंछ पग परिहरै, स्तन हि लागै धाइ ॥ 15 ॥ दादू काम गाय के दूध सौं, हाड़ चाम सौं नांहि । इहिं विधि अमृत पीजिये, साधु के मुख मांहि ॥ 16 ॥
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