भारतकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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श्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19 दादू सोई हमारा सांइयां, जे सबका पूरणहार । दादू जीवन मरण का, जाके हाथ विचार ॥ 5 ॥ दादू स्वर्ग भुवन पाताल मधि, आदि अंत सब सृष्ट । सिरज सबन को देत है, सोई हमारा इष्ट ॥ 6 ॥ दादू करणहार कर्त्ता पुरुष, हमको कैसी चिंत । सब काहू की करत है, सो दादू का मिंत ॥ 7 ॥ दादू मनसा वाचा कर्मणा, साहिब का विश्वास । सेवक सिरजनहार का, करे कौन की आस ? 8 ॥ शर्म न आवै जीव को, अनकिया सब होइ । दादू मारग मिहर का, बिरला बूझै कोइ ॥ 9 ॥ दादू उद्यम औगुण को नहीं, जे कर जाणै कोइ । उद्यम में आनन्द है, जे सांई सेती होइ ॥ 10 ॥ दादू पूरणहारा पूरसी, जो चित रहसी ठाम । अन्तर तैं हरि उमग सी, सकल निरंतर राम ॥ 11 ॥ पूरक पूरा पास है, नाहीं दूर, गँवार । सब जानत हैं, बावरे ! देबे को हुसियार ॥ 12 ॥ दादू चिन्ता राम को, समर्थ सब जाणै । दादू राम संभाल ले, चिंता जनि आणै ॥ 13 ॥ दादू चिन्ता कियां कुछ नहीं, चिंता जीव को खाइ । होना था सो ह्वै रह्या, जाना है सो जाइ ॥ 14 ॥ प्रतिपाल दादू जिन पहुँचाया प्राण को, उदर उर्ध्व मुख खीर । जठर अग्नि में राखिया, कोमल काया शरीर ॥ 15 ॥ दादू समर्थ संगी संग रहै, विकट घाट घट भीर । सो सांई सूं गहगही, जनि भूलै मन बीर ॥ 16 ॥

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